कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को गलत बताया है।
पीएम मोदी का आरोप
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने चिदंबरम का नाम लिए बिना उनके हालिया इंटरव्यू का हवाला दिया और कहा:
- "कांग्रेस के बड़े नेता और जो देश के गृह मंत्री तक रह चुके हैं, उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मुंबई हमले के बाद हमारी सेनाएं पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थीं।"
- "लेकिन कांग्रेस सरकार ने आतंकियों के सामने घुटने टेके थे।"
चिदंबरम का पलटवार
पीएम मोदी के इस बयान के एक दिन बाद, गुरुवार को चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
- "यह पढ़कर निराशा हुई कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने काल्पनिक बातों को मेरे नाम से जोड़ दिया।"
- उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ने उनकी बातों को गलत तरह से पेश किया है।
ज्ञात हो कि यह पूरा विवाद चिदंबरम द्वारा 30 सितंबर को दिए गए एक इंटरव्यू पर शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने 26/11 के बाद जवाबी कार्रवाई न करने के तत्कालीन यू.पी.ए. सरकार के निर्णय के पीछे अंतर्राष्ट्रीय दबाव का उल्लेख किया था।

2008 मुंबई हमला: PM मोदी ने कांग्रेस पर 'कमजोरी' दिखाने का आरोप लगाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर को मुंबई में एक कार्यक्रम में 2008 के 26/11 आतंकी हमले का जिक्र करते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर हमला किया।
पीएम मोदी के बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कमजोरी का संदेश: उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने 2008 में मुंबई को एक बड़े हमले के लिए चुना, लेकिन उस समय सत्ता में रही कांग्रेस सरकार ने "कमजोरी का मैसेज दिया" और "आतंकियों के सामने घुटने टेके"।
- सैन्य कार्रवाई से रोका गया: पीएम मोदी ने कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री (पी. चिदंबरम) के हालिया इंटरव्यू का हवाला दिया।
- विदेशी दबाव में फैसला: पीएम ने आरोप लगाया कि उस नेता के अनुसार, मुंबई हमले के बाद भारतीय सेनाएं पाकिस्तान पर जवाबी हमला करने के लिए तैयार थीं, और पूरा देश भी यही चाहता था, लेकिन "किसी दूसरे देश के दबाव के कारण" कांग्रेस सरकार ने सेनाओं को कार्रवाई करने से रोक दिया।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस से यह सवाल पूछा कि किसके कहने पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया।
26/11 मुंबई हमला: चिदंबरम ने बताई सैन्य कार्रवाई न करने की वजह
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने 30 सितंबर को एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद तत्कालीन यू.पी.ए. सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई क्यों नहीं की।
जवाबी कार्रवाई न करने के प्रमुख कारण
चिदंबरम के अनुसार, सरकार ने कई उच्च-स्तरीय चर्चाओं के बाद सैन्य कार्रवाई से बचने का फैसला लिया। मुख्य कारण थे:
- वैश्विक दबाव: चिदंबरम ने कहा, "पूरी दुनिया का दबाव था। हमें युद्ध नहीं करने के लिए समझाया जा रहा था।"
- अमेरिकी आग्रह: उन्होंने बताया कि तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री दिल्ली आई थीं और उन्होंने स्पष्ट रूप से "कृपया एक्शन नहीं लीजिएगा" कहा था।
विदेश मंत्रालय की राय: गृह मंत्री के मन में प्रतिशोध की भावना आने और प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करने के बावजूद, विदेश मंत्रालय का मानना था कि "सीधा हमला नहीं करना चाहिए" और इसके बजाय कूटनीतिक साधनों का उपयोग करना चाहिए।

चिदंबरम ने माना कि उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य जिम्मेदार लोगों से जवाबी कार्रवाई पर चर्चा की थी, लेकिन अंततः अंतर्राष्ट्रीय और कूटनीतिक सलाह को प्राथमिकता दी गई।
26/11 हमले का संक्षिप्त विवरण
- मौतें: इस आतंकी हमले में 175 लोगों की जान गई थी।
हमले की अवधि और स्थान: 60 घंटों तक चले इस भीषण हमले में 10 आतंकवादियों ने ताज होटल, सीएसटी रेलवे स्टेशन, नरीमन हाउस और कामा हॉस्पिटल सहित कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया था।

2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान, सुरक्षाबलों ने तीन दिनों तक आतंकवादियों से लोहा लिया।
आतंकियों का हश्र: सुरक्षाबलों ने 9 आतंकवादियों को मार गिराया।
अजमल कसाब की गिरफ्तारी: इन 10 आतंकियों में से एक, अजमल कसाब, को जिंदा पकड़ा गया था। उसे हमले के अगले ही दिन, 27 नवंबर 2008 को जुहू चौपाटी से गिरफ्तार किया गया था।
कानूनी प्रक्रिया
कसाब पर जनवरी 2009 में स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई।
मामले की 11 हज़ार पन्नों की पहली चार्जशीट 25 फरवरी 2009 को दाखिल की गई थी।
इस बीच, कसाब के नाबालिग होने को लेकर कानूनी विवाद भी चला।
मार्च 2010 में मामले से जुड़ी सुनवाई पूरी हुई, जिसके बाद कसाब को दोषी ठहराया गया और अंततः फांसी दी गई।

राणा के प्रत्यर्पण पर क्रेडिट की राजनीति: चिदंबरम ने UPA को भी श्रेय देने को कहा
2008 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के हालिया प्रत्यर्पण पर पी. चिदंबरम ने बयान देते हुए UPA सरकार को भी श्रेय दिए जाने की मांग की है।
- पिछली सरकार भी श्रेय की हकदार: चिदंबरम ने कहा कि वर्तमान NDA सरकार इस मामले में जो कुछ कर रही है, उसका क्रेडिट ले सकती है, लेकिन उसे पिछली सरकार को भी श्रेय देना चाहिए जिसने इस प्रक्रिया को शुरू करने में 'बहुत कुछ' किया है।
- कांग्रेस का दावा: कांग्रेस पार्टी का दावा है कि तहव्वुर राणा को भारत लाने की कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया UPA शासन (2009) के दौरान ही शुरू हो गई थी। इसलिए उनका मानना है कि NDA सरकार को इसका अकेले सारा क्रेडिट नहीं लेना चाहिए।