इस अवसर पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के उपमहानिदेशक (प्रशासन) डॉ. जगदीश राजेश ने इन योजनाओं का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की मुख्य घोषणा रही ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का विस्तार। इस पहल के तहत दमोह, सिंगरौली और मंडला जिलों के मरीज अब अपने घर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।
डॉ. राजेश ने बताया कि यह डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा पहुंच को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है।
उन्होंने कहा, "ई-संजीवनी जैसी सेवाएं भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को तकनीकी रूप से मजबूत बना रही हैं। यह पहल ग्रामीण जनता को समय पर इलाज सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।"
कार्यक्रम में BMHRC के वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
ई-संजीवनी सेवा के माध्यम से मरीजों को सिर्फ परामर्श ही नहीं, बल्कि डिजिटल पर्ची भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे लेकर वे स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
पहल का महत्व:
- ग्रामीण मरीजों को अब बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं
- समय और खर्च दोनों की होगी बचत
- चिकित्सा सुविधाओं में आएगी पारदर्शिता और तत्परता
यह पहल न केवल मध्यप्रदेश के लिए बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करती है कि किस प्रकार तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती हैं।