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प्रधान को बिहार, यादव को बंगाल और पांडा को तमिलनाडु की कमान

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बिहार, पश्चिम बंगाल, और तमिलनाडु के लिए चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की है।

1. बिहार (Bihar)

 
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2. पश्चिम बंगाल (West Bengal)

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3. तमिलनाडु (Tamil Nadu)

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भाजपा के चुनाव प्रभारी: नियुक्ति का समीकरण (3 मुख्य बिंदु)

भाजपा ने जिन वरिष्ठ नेताओं को चुनावी प्रभार सौंपा है, उनकी नियुक्ति के पीछे उनकी संगठनात्मक क्षमता और पिछले चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड का समीकरण काम कर रहा है:

1. धर्मेंद्र प्रधान: बिहार के लिए संगठन और मैनेजमेंट का अनुभव

  • योग्यता: प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री होने के साथ-साथ भाजपा के अनुभवी संगठनकर्ता और मोदी-शाह टीम के भरोसेमंद सदस्य हैं।
  • अनुभव: उन्होंने ओडिशा, उत्तराखंड, और कर्नाटक चुनावों में संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवारों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • रणनीति: बिहार जैसे जटिल जातीय समीकरण वाले राज्य में, उनकी संगठन क्षमता और चुनाव प्रबंधन का व्यापक अनुभव पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति साबित हो सकता है।

2. भूपेंद्र यादव: शानदार चुनावी प्रदर्शन का सफल ट्रैक रिकॉर्ड

  • योग्यता: यादव भाजपा के प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकार माने जाते हैं।
  • सफलता: उन्होंने बिहार (2020), मध्य प्रदेश (2023), गुजरात (2017), झारखंड (2014) और उत्तर प्रदेश (2017) जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक चुनाव प्रभारी की भूमिका निभाई है, जहां पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया।
  • रणनीति: पश्चिम बंगाल की जटिल राजनीति को देखते हुए, उनके सफल चुनावी अनुभव का उपयोग जमीनी स्तर की रणनीति को मजबूत करने और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मुकाबला करने के लिए किया जाएगा।

3. बैजयंत पांडा: साफ छवि और स्थानीय संतुलन

  • योग्यता: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पांडा की छवि साफ़ और गैर-विवादित है। वह अंग्रेजी में प्रभावशाली वक्ता हैं।
  • अनुभव: वह दिल्ली (2025), उत्तर प्रदेश (2024 लोकसभा), और कर्नाटक (2023) जैसे राज्यों में भी चुनाव प्रभारी रह चुके हैं, जहां पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया।
  • रणनीति: तमिलनाडु जैसे राज्य में, उनकी गैर-विवादित छवि स्थानीय गुटबाजी से दूर रहकर अलग-अलग धड़ों के बीच संतुलन बैठाने में सहायक होगी, जिससे पार्टी संगठन मजबूत हो सके और वह अपनी बात प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचा सकें।

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