
भोपाल: खेलों से लेकर आधारभूत ढांचे तक, बदलती तस्वीर का नया अध्याय
पिछले बीस वर्षों में भोपाल ने विकास की नई परिभाषा गढ़ी है। खेलों के केंद्र के रूप में पहचान बनाने के साथ-साथ शहर ने आधारभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। हबीबगंज स्टेशन अब आधुनिक कमलापति स्टेशन का रूप ले चुका है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है।
राजा भोज एयरपोर्ट से देश के प्रमुख शहरों तक सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं, वहीं सड़क मार्गों ने राजधानी को प्रदेश और देश के अन्य महानगरों से जोड़े रखा है। शहर के भीतर आवागमन को आसान बनाने के लिए एक दर्जन से अधिक फ्लाईओवर तैयार किए जा चुके हैं। इससे न केवल ट्रैफिक की समस्या में राहत मिली है बल्कि शहर का स्वरूप भी और आकर्षक हो गया है।
भोपाल: मौसम, झीलें और मेहमाननवाजी का शहर
भोपाल की पहचान सिर्फ इसकी विकास यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का मौसम और प्राकृतिक खूबसूरती भी लोगों को बांध लेती है। सदाबहार माहौल, झीलों की ठंडी हवा और हरियाली का नज़ारा इसे जीने लायक शहर बना देता है।
ताल-तलैया जहां भोपाल की आत्मा माने जाते हैं, वहीं यहां का खान-पान और मेहमाननवाजी हर आगंतुक का दिल जीत लेती है। यही कारण है कि कई लोग यहां आकर बस जाते हैं और इसे अपना दूसरा घर बना लेते हैं।
भोपाल की एक और खासियत है यहां के लोग—खुशी हो या कठिनाई, हर परिस्थिति में साथ खड़े होने वाले। खेलों के क्षेत्र में भी यह शहर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। एमपी राज्य कराते अकादमी की स्थापना ने युवाओं को खेलों की नई दिशा दी, और बतौर मुख्य प्रशिक्षक इस पहल का हिस्सा होना किसी भी खेलप्रेमी के लिए गर्व की बात है।
एमपी की खेल यात्रा: 12 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन और अनगिनत उपलब्धियां
मध्यप्रदेश ने खेलों में ऐसी पहचान बनाई है, जिस पर हर नागरिक गर्व कर सकता है। लगातार 12 वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन रहकर राज्य ने अपनी ताकत साबित की। यहां से दर्जनों खिलाड़ी न सिर्फ देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, बल्कि विश्वामित्र, विक्रम और एकलव्य जैसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड भी जीत चुके हैं।
आज कई खिलाड़ी राज्य और केंद्र सरकार की सेवाओं में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कराते अकादमी के साथ बॉक्सिंग, फेंसिंग, जूडो और कुश्ती जैसी मार्शल आर्ट अकादमियां भी पूरी ऊर्जा के साथ चल रही हैं। इन अकादमियों से निकलने वाले खिलाड़ी लगातार देश-प्रदेश का मान बढ़ा रहे हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
भोपाल: शिक्षा, कला और पर्यटन का आदर्श केंद्र
विश्वामित्र अवार्डी कराटे प्रशिक्षक जयदेव शर्मा के अनुसार, भोपाल न केवल खेलों में बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी देशभर के छात्रों के लिए आदर्श शहर बन चुका है। यहां बीयू, एमसीयू, आरजीपीवी और मैनिट जैसे प्रमुख शासकीय विश्वविद्यालय मौजूद हैं, साथ ही करीब एक दर्जन निजी विश्वविद्यालय भी उच्च शिक्षा की उपलब्धता बढ़ा रहे हैं।
भोपाल सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है; कला, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में भी इस शहर ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ताल-तलैया, ऐतिहासिक स्थल और सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को आकर्षक बनाते हैं, जिससे भोपाल न केवल सीखने बल्कि अनुभव करने का भी आदर्श स्थल बन गया है।