चीन ने अमेरिका से जापान में तैनात अपने 'टाइफून' मिड-रेंज मिसाइल सिस्टम को हटाने की मांग की है। चीन ने कहा है कि यह तैनाती क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका और जापान, चीन की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास के नाम पर 'टाइफून' मिसाइल प्रणाली की तैनाती कर रहे हैं।यह हथियार जमीन से दागी जाने वाली 'टॉमहॉक' मिसाइलों को लॉन्च कर सकता है, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर तक है। इसका मतलब है कि यह दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और दक्षिणी चीन के कुछ हिस्सों को भी निशाना बना सकता है।

चीन ने अमेरिका पर हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि एशियाई देशों में 'टाइफून' मिसाइल सिस्टम की तैनाती दूसरे देशों के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र में हथियारों की होड़ और सैन्य टकराव के जोखिम को बढ़ाएगा, जिससे रणनीतिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।जियान ने अमेरिका और जापान से अपील की कि वे दूसरे देशों की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करें और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
सैन्य अभ्यास के लिए हुई है तैनाती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान में इस मिसाइल प्रणाली की तैनाती रेजोल्यूट ड्रैगन नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए की गई है, जो 16 से 25 सितंबर तक चलेगा। इस अभ्यास में 19,000 से अधिक अमेरिकी और जापानी सैनिक भाग ले रहे हैं।यह अभ्यास ताइवान, सेनकाकू द्वीप और पूर्वी चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका-जापान गठबंधन की ताकत को दर्शाने के लिए किया जा रहा है। हाल ही में जापान के पास चीन के नए एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियन' को देखे जाने के बाद जापान की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।जापान चीन, उत्तर कोरिया और रूस की मिसाइल धमकियों का मुकाबला करने के लिए अपनी शक्ति को बढ़ा रहा है और मध्य-से-लंबी दूरी की मिसाइलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 'टाइफून' प्रणाली जापान, ताइवान और फिलीपींसकी रक्षा पंक्ति "फर्स्ट आइलैंड चेन" को मजबूत करने में मदद करती है।

अमेरिका ने इस मिसाइल प्रणाली को पहले भी दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के पास तैनात किया था, जिस पर चीन ने आपत्ति जताई थी।अमेरिका ने पहली बार अप्रैल 2024 में 'टाइफून' सिस्टम को फिलीपींस भेजा था। यह इसकी पहली विदेशी तैनाती थी और इसे एक संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए लाया गया था। फिलीपींस इस 'टाइफून' प्रणाली को स्थायी रूप से खरीदने में भी रुचि दिखा चुका है।