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खरीददार-विक्रेता बनकर फर्जी लेन-देन, जीएसटी चोरी की पड़ताल तेज़

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फर्जी बिलों से करोड़ों की जीएसटी चोरी, व्यापारी बने खरीदार भी और विक्रेता भी 

प्रदेश में जीएसटी चोरी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। इस साल का दूसरा बड़ा रैकेट उजागर हुआ है, जिसने विभाग की नींद उड़ा दी है। राज्य जीएसटी विभाग और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की संयुक्त टीम ने जांच में पाया कि कारोबारी आपस में ही खरीदार और विक्रेता बनकर करोड़ों का लेन-देन दिखा रहे थे।

जांच में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक व्यापारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की सीमेंट बिक्री का बिल बनाया और दूसरे व्यापारी के नाम पर चढ़ा दिया। बदले में उसी व्यापारी ने बराबर रकम का माल बेचने का कागज़ तैयार कर दिया। यानी माल का कोई वास्तविक लेन-देन हुआ ही नहीं, सब कागज़ों पर खेला गया खेल था।

अब तक 25 से ज्यादा ऐसे फर्जी बिल पकड़ में आ चुके हैं और अधिकारियों का अनुमान है कि यह संख्या 150 तक पहुंच सकती है। विभाग ने संबंधित व्यापारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और रैकेट से जुड़े अन्य नाम भी जल्द सामने आने की संभावना है


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