फ्रांस सहित 5 देशों ने फिलिस्तीन को दी मान्यता
फ्रांस, मोनाको, माल्टा, लक्जमबर्ग और बेल्जियम ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है। सोमवार की देर रात, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की एक बैठक में इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। इस बैठक का उद्देश्य इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष का समाधान निकालना था।फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज फ्रांस फिलिस्तीन को मान्यता दे रहा है, और यह शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे हमास की हार भी बताया, जिस पर बैठक में मौजूद फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों ने खड़े होकर स्वागत किया।
इज़राइल ने किया विरोध, बेल्जियम ने रखी शर्त
इज़राइल ने इस पहल का कड़ा विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत, डैनी डैनन ने कहा है कि उनकी सरकार इस कदम का जवाब देगी।वहीं, बेल्जियम ने फिलिस्तीन को मान्यता देने के लिए एक शर्त रखी है: यह तभी प्रभावी होगी जब गाजा से हमास को सत्ता से हटाया जाएगा और सभी इज़राइली बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा।
पहले भी मिली मान्यता
इससे पहले, रविवार को चार अन्य देश - ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल - फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। अब तक कुल लगभग 150 देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति ने हमास को हथियार छोड़ने को कहा
फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने हमास से हथियार छोड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में गाजा पर शासन में हमास की कोई भूमिका नहीं होगी।
फिलिस्तीन में चुनाव का वादा और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने गाजा में युद्ध खत्म होने के बाद राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराने का वादा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले तीन महीनों में एक अंतरिम संविधान बनाया जाएगा ताकि सत्ता को अथॉरिटी से राज्य में स्थानांतरित किया जा सके।अब्बास ने उन सभी देशों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता दी है और अन्य देशों से भी ऐसा करने की अपील की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता के लिए भी समर्थन मांगा।
अमेरिका के करीबी देश क्यों दे रहे हैं मान्यता?
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, कई पश्चिमी देश पहले यह मानते थे कि फिलिस्तीन को मान्यता देने का सही समय नहीं है क्योंकि इससे जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। हालांकि, गाजा में चल रहे युद्ध, भुखमरी और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण स्थिति बहुत गंभीर हो गई है।दुनिया भर में इजराइल के खिलाफ बन रहे नकारात्मक माहौल के कारण अब इन देशों पर दबाव बढ़ रहा है। इसी वजह से अमेरिका के करीबी माने जाने वाले देशों ने भी फिलिस्तीन को मान्यता देने का फैसला किया है।

75% से ज्यादा देशों ने फिलिस्तीन को दी मान्यता
संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से लगभग 75% ने फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को 'परमानेंट ऑब्जर्वर स्टेट' का दर्जा प्राप्त है, जिसका मतलब है कि वे बैठकों में भाग ले सकते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में समर्थन
फ्रांस द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद, फिलिस्तीन को अब यूएनएससी के पाँच स्थायी सदस्यों में से चार का समर्थन मिल गया है। चीन और रूस ने 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दे दी थी।अब, यूएनएससी के पाँच स्थायी देशों में से केवल अमेरिका ही ऐसा है जिसने फिलिस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता नहीं दी है। अमेरिका ने केवल फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) को मान्यता दी है, जिसे 1994 में फिलिस्तीनियों के लिए एक स्थानीय सरकार जैसी व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।