मध्य प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और मवेशियों की नस्ल सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उत्तराखंड के बाद, मध्य प्रदेश दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जहाँ कृत्रिम गर्भाधान (AI) तकनीक का उपयोग करके केवल बछिया (मादा बछड़े) ही पैदा की जाएंगी।

इस योजना का उद्देश्य और कार्यान्वयन
इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ाना है, जिसके लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश को प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य दिया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले पाँच वर्षों में 25 लाख सेक्स सॉर्टेड सीमेन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, भोपाल में स्थित सेंट्रल सीमेन स्टेशन में 2 लाख सेक्स सॉर्टेड सीमेन तैयार किए जा रहे हैं।
पशुपालकों के लिए लाभ
इस पहल के तहत, सरकार ने भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की भी घोषणा की है। इस योजना के माध्यम से, पशुपालकों को 10 लाख से 14 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी ताकि वे बेहतर नस्ल के मवेशी पाल सकें और दूध उत्पादन बढ़ा सकें।
एआई तकनीक से कैसे पैदा होगी बछिया?
पारंपरिक कृत्रिम गर्भाधान में नर और मादा दोनों तरह के भ्रूण बनने की संभावना होती है। लेकिन, इस नई सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक में सिर्फ मादा क्रोमोसोम (X क्रोमोसोम) वाले शुक्राणु को ही अलग करके उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में, उच्च-तकनीकी मशीनों का उपयोग करके शुक्राणु को छांटा जाता है। जब इस विशेष सीमेन को गाय के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, तो इससे केवल मादा बछिया ही पैदा होती है।इस प्रकार, यह तकनीक न केवल दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि मवेशियों की आबादी में मादा पशुओं की संख्या को भी बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में दूध उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित होगी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. देशपांडे ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत तीन साल पहले की गई थी। इसके नतीजे काफी अच्छे रहे हैं, क्योंकि 95% गायों ने बछिया (मादा बछड़े) को जन्म दिया है।

इस योजना का फायदा
जैसे-जैसे सेक्स सॉर्टेड सीमन का उपयोग कृत्रिम गर्भाधान में बढ़ेगा, किसानों के पास बेहतर नस्ल की गायें पैदा होंगी। इससे न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की संख्या में भी कमी आएगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि पशुपालक सिर्फ उन्हीं मवेशियों को पालेंगे जो दुधारू हैं।हालाँकि, इस प्रक्रिया को तेज़ी से अपनाने में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। सेक्स सॉर्टेड सीमन के उत्पादन की लागत बहुत ज़्यादा है, एक सीमन की कीमत ₹850 तक होती है। सरकार इसमें सब्सिडी देती है, जिसके बाद किसान या पशुपालक इसे ₹100 में खरीद पाते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
योजना की मुख्य बातें
- पशु यूनिट: इस योजना के तहत, 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट स्थापित की जाएगी।
- लागत: एक यूनिट की कुल लागत ₹42 लाख होगी।
- पात्रता: इस योजना का लाभ केवल मध्य प्रदेश के मूल निवासियों को ही मिलेगा।
- आवश्यकता: योजना का लाभ लेने वाले लोगों को डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
- अधिकतम यूनिट: एक व्यक्ति इस योजना के तहत अधिकतम 8 यूनिट, यानी कुल 200 पशु पाल सकता है।
गोशालाओं के लिए सहायता

सरकार ने गोशालाओं को मिलने वाली आर्थिक मदद को भी दोगुना कर दिया है। पहले प्रति गाय प्रतिदिन ₹20 मिलते थे, जिसे अब बढ़ाकर ₹40 कर दिया गया है।
सब्सिडी और लोन
इस योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की एक यूनिट स्थापित करने के लिए पशुपालकों को ₹42 लाख तक का लोन दिया जाएगा। इस पर मिलने वाली सब्सिडी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग है:
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को 33% तक की सब्सिडी (लगभग ₹14 लाख)।
- सामान्य (General) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 25% तक की सब्सिडी (लगभग ₹10 लाख)।
योजना के नियम
- लोन और सब्सिडी: लोन चार चरणों में दिया जाएगा। सब्सिडी की राशि तीन साल की लॉक-इन अवधि के बाद एकमुश्त दी जाएगी और इस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा।
- अवधि: योजना का लाभ लेने वाले पशुपालकों को अपनी डेयरी यूनिट को कम से कम सात साल तक चलाना अनिवार्य है।
- शर्त: यदि कोई लाभार्थी सात साल की अवधि पूरी नहीं कर पाता है, तो सरकार उससे दी गई सब्सिडी वापस ले सकती है।
भुगतान: लाभार्थी निर्धारित समय से पहले भी लोन चुका सकते हैं।
शुपालन एवं डेयरी विभाग के मंत्री, लखन पटेल, ने बताया कि सरकार उन पशुपालकों को प्राथमिकता देगी जो पहले से ही दुग्ध संघों को दूध की आपूर्ति कर रहे हैं। इस योजना का लाभ उन पशुपालकों को भी मिलेगा जो दुग्ध संघों के मौजूदा या नए मिल्क रूट के अंतर्गत आते हैं।
योजना की प्रमुख बातें
- पशुओं का चुनाव: कोई भी पशुपालक अपनी पसंद के अनुसार 25 गायों या 25 भैंसों की एक यूनिट स्थापित कर सकता है। इसके अलावा, वह गाय और भैंस दोनों को मिलाकर भी एक यूनिट बना सकता है।
- अधिकतम यूनिट: यदि कोई पशुपालक एक से अधिक यूनिट लेना चाहता है, तो उसके पास अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग यूनिट चुनने का विकल्प होगा।
- विकल्प: उदाहरण के लिए, यदि कोई तीन यूनिट लेता है, तो वह भैंस, संकर गाय, और उन्नत देसी गाय की एक-एक यूनिट का चयन कर सकता है।
लोन की पात्रता: एक बार लोन चुकाने के बाद, पशुपालक दोबारा इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होगा। इस तरह, वह आठ यूनिट तक (यानी 200 गाय या भैंस) खरीद सकता है। हालांकि, एक लोन से दूसरे लोन के बीच कम से कम 2 साल का अंतर होना जरूरी है।
पशुपालन मंत्री लखन पटेल के अनुसार, मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा देना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि राज्य की सहकारी समितियाँ वर्तमान में प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध एकत्र करती हैं, जिसे 20 लाख लीटर तक बढ़ाने का लक्ष्य था।
नए लक्ष्य और प्रगति
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के सुझाव पर इस लक्ष्य को बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन कर दिया गया है। इस बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पशुओं की संख्या बढ़ाना ज़रूरी है।मंत्री पटेल ने बताया कि कामधेनु योजना के तहत शुरुआत में 850 से 900 लाभार्थियों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन एक महीने के भीतर ही 1400 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से कई पशुपालकों ने 200 गायों (यानी 8 यूनिट) के लिए पंजीकरण कराया है।
क्रियान्वयन और सफलता
अब तक 600-700 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। एक कमेटी ने करीब 350-400 मामलों को विभिन्न जिलों में भेजा है, और इनमें से लगभग 20 मामलों में बैंकों से लोन भी स्वीकृत हो गया है। इन लाभार्थियों को अगले एक-दो महीने के भीतर गायें मिलने की उम्मीद है।