
इंदौर-उज्जैन रिंग रोड: हरियाली की कीमत पर तेज़ी से बढ़ा सर्वे
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन तक बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए पूर्वी रिंग रोड परियोजना पर काम तेज़ हो गया है। लगभग 77 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग में करीब 50 हेक्टेयर वनभूमि शामिल हो रही है। शुरुआती सर्वे में यहां मौजूद 5,500 से अधिक पेड़ों को चिह्नित किया गया है, जिनकी कटाई आगे की प्रक्रिया में शामिल हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, तिल्लौर और पठान पिपलिया के वन क्षेत्र इस रिंग रोड की जद में आ रहे हैं। सर्वे पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर यह परियोजना ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन पेड़ों की बलि ने पर्यावरण चिंतकों की चिंता बढ़ा दी हैइंदौर-उज्जैन रिंग रोड: हरियाली की कीमत पर तेज़ी से बढ़ा सर्वे
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन तक बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए पूर्वी रिंग रोड परियोजना पर काम तेज़ हो गया है। लगभग 77 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग में करीब 50 हेक्टेयर वनभूमि शामिल हो रही है। शुरुआती सर्वे में यहां मौजूद 5,500 से अधिक पेड़ों को चिह्नित किया गया है, जिनकी कटाई आगे की प्रक्रिया में शामिल हो सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, तिल्लौर और पठान पिपलिया के वन क्षेत्र इस रिंग रोड की जद में आ रहे हैं। सर्वे पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर यह परियोजना ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन पेड़ों की बलि ने पर्यावरण चिंतकों की चिंता बढ़ा दी है।
इंदौर में डकाच्या से पीथमपुर तक बनने वाले पूर्वी आउटर रिंग रोड के लिए तैयारियां तेज़ हो गई हैं। लगभग चार हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस सड़क का निर्माण कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपा गया है।करीब 38 गांव इस परियोजना के दायरे में आ रहे हैं। वर्तमान में ज़मीन की पहचान और चिह्नांकन की प्रक्रिया जारी है। सरकार की कोशिश है कि निजी ज़मीन के बजाय अधिकतम हिस्से को सरकारी भूमि से लिया जाए, ताकि अधिग्रहण में विवाद और देरी न हो।यह रिंग रोड भविष्य में न सिर्फ ट्रैफिक दबाव को कम करेगा बल्कि औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर और इंदौर शहर के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर बनाएगा।