मध्यप्रदेश के आलीराजपुर और महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के बीच नर्मदा नदी पर नया सेतु बनाने का प्रस्ताव क्षेत्र में कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है। जलसंधि क्षेत्र के पास बनने वाले इस पुल से दोनों राज्यों के बीच सीधा मार्ग तैयार होगा। वर्तमान में जहां आलीराजपुर से नंदुरबार पहुंचने में लगभग 250 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, वहीं नए सेतु के शुरू होने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 125 किलोमीटर रह जाएगी। इससे यात्रियों और व्यापारियों—दोनों को समय और धन की बड़ी बचत होगी।
नदी के दोनों किनारों के गांव दशकों से आपस में जुड़े, पर रास्ते की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
नर्मदा नदी के दोनों ओर बसे आलीराजपुर जिले के मथवाड़, खोड़ आम्बा, वाकानेर, आकड़िया, उमरला और जलसंधि जैसे गांव आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से महाराष्ट्र के धड़गांव–डमखेडी क्षेत्र से वर्षों से जुड़े रहे हैं।
लेकिन इन मजबूत संबंधों के बीच सबसे बड़ी बाधा है नदी पार करने का सुरक्षित और स्थायी साधन न होना।
लोग अब भी पारंपरिक नावों पर निर्भर हैं, और बरसात के मौसम में नर्मदा का तेज प्रवाह आवाजाही को पूरी तरह रोक देता है। इसका सीधा असर पड़ता है—
बच्चों की शिक्षा पर,
बीमारों के अस्पताल पहुंचने पर,
व्यापार और अनाज–सब्जी की सप्लाई पर,
तथा रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर।
गांवों के लोगों की दिनचर्या कई दिनों तक ठप हो जाती है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल से प्रस्ताव आगे बढ़ा
हाल ही में विधायक प्रतिनिधि दिलीप चौहान के नेतृत्व में आलीराजपुर के सरपंचों और जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल जलसंधि से धड़गांव तक पहुंचा।
धड़गांव नगर पंचायत अध्यक्ष धनसिंह दलाला पावरा ने इस प्रस्ताव को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि पुल निर्माण से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि नंदुरबार जिले की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
स्थानीय प्रतिनिधियों का मानना है कि इस सेतु से—
व्यापार
कृषि उत्पादों की सप्लाई
और स्थानीय रोजगार
को नई दिशा मिलेगी।
सेतु निर्माण का व्यापक प्रभाव: तीन राज्यों की अर्थव्यवस्था बदलेगी
विशेषज्ञों के अनुसार नए नर्मदा सेतु के निर्माण से परिवहन और लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी आएगी, जिससे मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र ही नहीं, गुजरात के लिए भी नया व्यापारिक कॉरिडोर बनेगा।
इससे फायदा होगा—
आलीराजपुर–धड़गांव–नंदुरबार की मंडियों को,
इंदौर–मुम्बई मार्ग से यात्रा और व्यापार में,
तथा पश्चिम भारत की समग्र कनेक्टिविटी में।
परियोजना से पर्यटन को भी गति मिलने की उम्मीद है, खासकर नर्मदा किनारे स्थित धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों—हापेश्वर, कबीरवड और नदी तट के दर्शनीय स्थानों में।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए ‘गेम चेंजर’
आलीराजपुर और नंदुरबार दोनों ही आदिवासी बहुल इलाके हैं। नए सेतु से इन क्षेत्रों में—
बेहतर परिवहन
रोजगार के अवसर
स्वास्थ्य सेवाओं तक त्वरित पहुंच
शिक्षा और बाजार तक आसान मार्ग
मिलेगा।
स्थानीय समुदायों का कहना है कि यह परियोजना उनके लिए ‘जीवनरेखा’ साबित हो सकती है।
अगले कदम
जलसंधि क्षेत्र के पास प्रस्तावित सेतु के लिए दोनों राज्यों की संयुक्त तकनीकी टीमें जल्द ही सर्वेक्षण कर सकती हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे संबंधित कैबिनेट में भेजकर मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
क्षेत्र के विकास, यात्रा समय की आधी दूरी और सामाजिक–आर्थिक लाभों को देखते हुए यह परियोजना पश्चिम भारत की कनेक्टिविटी में नई क्रांति लाने की क्षमता रखती है।