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इनसाइड स्टोरी

PM की अचानक ऑनलाइन मीटिंग, शाह का एक फोन, और सिर्फ तीन लोगों को थी पूरी खबर

भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की नियुक्ति अचानक जरूर लगी, लेकिन इसके पीछे एक बेहद सीमित दायरे में लिया गया रणनीतिक फैसला छिपा था। 14 दिसंबर को जैसे ही पार्टी ने नाम का औपचारिक ऐलान किया, संगठन से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे फैसले की जानकारी ऐलान से पहले केवल तीन शीर्ष नेताओं तक सीमित थी—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष।

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दो दिन पहले PM की ऑनलाइन मीटिंग, लेकिन नाम पर नहीं हुई चर्चा

पार्टी सूत्र बताते हैं कि 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों को बेहद कम नोटिस पर एक ऑनलाइन बैठक के लिए बुलाया था। बैठक का एजेंडा स्पष्ट था—पार्टी को किस तरह का राष्ट्रीय नेतृत्व चाहिए।

PM ने साफ कहा कि किसी भी सदस्य को किसी नाम का सुझाव नहीं देना है, बल्कि केवल यह बताना है कि पार्टी के अगले अध्यक्ष में कौन-कौन से गुण होने चाहिए।

करीब 45 मिनट चली इस बैठक में बोर्ड सदस्यों की राय से जो बिंदु बार-बार उभरकर आए, वे थे:

  • युवा और ऊर्जावान नेतृत्व

  • संगठन और सरकार के बीच संतुलन

  • विवादों से दूर रहने वाला चेहरा

  • संघ और संगठन दोनों का अनुभव

  • हिंदी भाषी पृष्ठभूमि

इस बैठक के बाद किसी को यह अंदाजा नहीं था कि महज 48 घंटे के भीतर कार्यकारी अध्यक्ष का नाम फाइनल हो जाएगा।

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14 दिसंबर: शाह का फोन और एक घंटे में लेटर तैयार

14 दिसंबर की शाम लखनऊ में BJP के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह एक कार्यक्रम में व्यस्त थे। तभी उन्हें गृह मंत्री अमित शाह का फोन आया। निर्देश साफ था—नए कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का पत्र तुरंत तैयार कर पार्टी और संगठन में सर्कुलेट किया जाए। नाम था—नितिन नबीन।

सूत्रों के मुताबिक, एक घंटे से भी कम समय में आधिकारिक पत्र तैयार होकर संबंधित नेताओं तक पहुंचा दिया गया। इस तेजी ने कई संभावित दावेदारों को चौंका दिया।

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ऐलान से पहले सिर्फ तीन राजदार

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जिस दिन नाम घोषित हुआ, उस दिन PM मोदी, अमित शाह और बीएल संतोष एक साथ मौजूद थे। यहीं अंतिम सहमति बनी। इसी के बाद बीएल संतोष ने नितिन नबीन को व्यक्तिगत रूप से फैसले की जानकारी दी।

इसके अलावा किसी भी वरिष्ठ नेता या प्रदेश संगठन को पहले से कोई संकेत नहीं दिया गया था। अधिकतर नेताओं को इसकी जानकारी तभी मिली, जब आधिकारिक पत्र सार्वजनिक हुआ।

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नितिन नबीन को कब मिली खबर?

नितिन नबीन उस दिन बिहार में अपनी विधानसभा क्षेत्र बांकीपुर में एक कार्यक्रम में शामिल थे। वे कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह में व्यस्त थे। दोपहर करीब ढाई बजे उन्हें संगठन महामंत्री बीएल संतोष का फोन आया और तुरंत दिल्ली पहुंचने को कहा गया।

करीबी लोगों के मुताबिक, तब तक नितिन नबीन को भी यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें कौन-सी जिम्मेदारी मिलने जा रही है।

प्रवक्ताओं को पहले ही मिल गया था संकेत

पार्टी सूत्र बताते हैं कि 13 दिसंबर को राष्ट्रीय कार्यालय में वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े की अध्यक्षता में प्रवक्ताओं की बैठक हुई थी। इसमें साफ निर्देश दिए गए थे कि यूपी अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर किसी भी तरह की अटकलों या बयानबाजी से बचा जाए।

हालांकि बैठक में किसी नाम पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन यह संकेत जरूर दे दिया गया था कि नेतृत्व को लेकर जल्द फैसला हो सकता है।

कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया क्यों नहीं हुई?

BJP के अंदरूनी कामकाज से जुड़े लोगों का कहना है कि कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए औपचारिक चुनाव प्रक्रिया जरूरी नहीं होती। पहले भी जेपी नड्डा को इसी तरह कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। स्थायी अध्यक्ष बनने पर ही पूरी संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।

कार्यकारी अध्यक्ष के अधिकार क्या होंगे?

सूत्रों के अनुसार, कार्यकारी अध्यक्ष फिलहाल संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव नहीं कर सकते। वे न तो टीम में नए सदस्य जोड़ सकते हैं और न ही किसी को हटा सकते हैं। उनकी भूमिका मौजूदा सिस्टम की निगरानी, समन्वय और संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगी।

पूर्व अध्यक्ष को भी कुछ समय तक चल रहे कार्यों को ट्रांसफर करने और मार्गदर्शन देने की भूमिका मिलेगी।

मंत्रिपद से इस्तीफा

नितिन नबीन ने कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके पास पथ निर्माण और नगर विकास जैसे अहम विभाग थे। यह कदम पार्टी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ सिद्धांत के तहत उठाया गया।


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