पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने हाल ही में भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक संयोग है और उम्मीद जताई कि चीन भी भारत की सद्भावना का जवाब देगा।

भारत-चीन संबंधों पर नरवणे का बयान
जनरल नरवणे ने गुरुवार शाम को दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सुधार हो रहा है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि दोनों देश सीमा विवाद पर चर्चा जारी रखे हुए हैं। नरवणे ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के बीच की सीमा एक 'सरहद' नहीं, बल्कि एक 'सीमा' है, जो बातचीत के लिए खुली है और जहाँ समझौता संभव है।

संबंधों में सुधार के लिए पहल
भारत और चीन ने हाल ही में अपने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इन पहलों का उद्देश्य एक स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी संबंध स्थापित करना है। इनमें शामिल हैं:
- सीमा पर संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना।
- सीमा व्यापार (बॉर्डर ट्रेड) को फिर से शुरू करना।
- दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देना।
- जल्द ही सीधी उड़ानें (डायरेक्ट फ्लाइट्स) शुरू करना।
इन घोषणाओं से यह उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को कम किया जा सकता है और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी जा सकती है।

भारत-चीन संबंधों पर पूर्व सेना प्रमुख का बयान
पूर्व सेना प्रमुख ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध अब सुधर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे दोनों देश आगे बढ़ेंगे, चीन भी भारत की ओर से दिखाई गई सद्भावना का सम्मान करेगा और उसका जवाब देगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
सीमा विवाद और राजनीतिक समझौते
जनरल नरवणे ने 2005 में हुए राजनीतिक और मार्गदर्शक सिद्धांतों के समझौते का जिक्र किया, जिसे सीमा विवाद सुलझाने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा कि इस समझौते से ज्यादा प्रगति नहीं हुई, लेकिन हाल ही में बातचीत का फिर से शुरू होना एक सकारात्मक संकेत है।
नरवणे ने 2024 में दिए गए प्रधानमंत्री मोदी के एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा विवाद का जल्द समाधान जरूरी है।

गलवान संघर्ष और आत्मकथा का जिक्र
पूर्व आर्मी चीफ ने अपनी आत्मकथा में गलवान घाटी में हुई झड़प के बारे में भी लिखा है। उन्होंने कहा कि 16 जून, 2020 की तारीख को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शायद कभी नहीं भूल पाएंगे, क्योंकि इस संघर्ष में भारतीय सेना ने उनके 40 से अधिक सैनिकों को मार गिराया था।
जनरल नरवणे दिसंबर 2019 में 28वें सेनाध्यक्ष बने थे और चार दशकों की सेवा के बाद अप्रैल 2022 में सेवानिवृत्त हुए। उनकी टिप्पणियाँ भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा तनाव और राजनयिक प्रयासों की जटिलता को दर्शाती हैं।