
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सबरीमाला मंदिर के गेट पर रखी दो मूर्तियों (द्वारपालकों) से सोने की हेराफेरी के मामले में क्रिमिनल केस दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब तक की जाँच से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सोने की हेराफेरी हुई है।
कोर्ट का निर्देश और जांच रिपोर्ट
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने SIT को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
- छह हफ्ते के भीतर जांच की रिपोर्ट दाखिल करें।
- हर दो हफ्ते में एक बार जांच की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
- जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए।
प्रायोजक को सौंपे गए सोने का हिसाब नहीं
कोर्ट ने कहा कि अब तक की जाँच से यह पता चला है कि मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने की पेशकश करने वाले प्रायोजक, उन्नीकृष्णन पोट्टी, को बड़ी मात्रा में सोना सौंपा गया था।
- कोर्ट के अनुसार, पोट्टी को लगभग 474.9 ग्राम सोना दिया गया था।
- हालांकि, रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि यह सारा सोना त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) को (पोट्टी द्वारा) सौंपा गया था।
TDB में गड़बड़ी का संकेत
हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर सोमवार को भी चिंता जताई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि केस के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने TDB अध्यक्ष को जो ईमेल भेजा था, उससे साफ पता चलता है कि TDB में "सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है"।कोर्ट ने पोट्टी के ईमेल का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने TDB अध्यक्ष से कहा था कि गोल्ड प्लेट चढ़ाने के बाद कुछ सोना बच गया है, जिसे वह एक ज़रूरतमंद लड़की की शादी में दान करना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें TDB का सहयोग चाहिए।

सबरीमाला गोल्ड केस: हाईकोर्ट ने SIT गठित की, TDB अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह
केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों से जुड़े सोने की हेराफेरी के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
SIT का गठन और निर्देश
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने SIT को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
- SIT को छह हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
- SIT सीधे अदालत को रिपोर्ट करेगी।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि जाँच अत्यंत गोपनीयता और ईमानदारी से की जाए।
1999 में चढ़ाया गया था सोना
अदालत ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। कोर्ट ने कहा कि 2019 में जब मूर्तियों को सोने की परत चढ़ाने के लिए पोट्टी (प्रायोजक) को सौंपा गया था, तो उन पर केवल तांबे की प्लेटें नहीं थीं, बल्कि उन पर 1999 में ही सोने की परत चढ़ाई गई थी। कोर्ट ने कहा, “इस खुलासे से चोरी का केस बन गया है।”
कोर्ट ने इस मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधिकारियों की संलिप्तता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा:
- "यह खुलासा परेशान करता है। इससे पता चलता है कि TDB के अधिकारी भी पोट्टी के साथ मिले हुए हैं।"
- इस हेराफेरी के लिए केवल पोट्टी और उनकी संस्था 'स्मार्ट क्रिएशंस' ही नहीं, बल्कि TDB के कुछ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं।
- कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साफ़ पता चलता है कि TDB के अधिकारियों को लेन-देन और सोने के अवैध ट्रांसफर की जानकारी थी।
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने सबरीमाला मामले में मंगलवार को हरिपाद के डिप्टी देवास्वोम कमिश्नर बी. मुरारी बाबू को निलंबित कर दिया। बोर्ड ने उनके निलंबन को जांच का हिस्सा बताया।
निलंबन का कारण
बोर्ड के अनुसार, बाबू ने 17 जुलाई 2019 को सबरीमाला के कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लगी सोने की मूर्तियों को गलत तरीके से 'तांबे की' बताया था। TDB ने इसे गंभीर चूक माना।हालांकि, बाबू ने इन आरोपों से इनकार किया है। बाबू ने दावा किया कि 2019 में उन्होंने मंदिर के तांत्री की राय लेने के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। उन्होंने रिपोर्ट में 'तांबे की प्लेट' इसलिए लिखा क्योंकि "वास्तव में तांबा ही साफ दिख रहा था"। इसलिए, मूर्तियों पर सोना चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
पूरे मामले की पृष्ठभूमि
साल 2019:
- उन्नीकृष्णन पोट्टी ने अपने खर्च पर मंदिर की मूर्तियों और कीमती वस्तुओं पर सोने की परत चढ़ाने के लिए TDB की मंजूरी हासिल की।
- TDB ने 42.8 किलोग्राम वजन वाले इन सामानों को पोट्टी की कंपनी स्मार्ट क्रिएशंस, चेन्नई को सौंप दिया।
साल 2020:
- पोट्टी ने सोने की परत चढ़ाने के बाद सामान TDB को सौंप दिया।
- इसके बाद पोट्टी ने ही आरोप लगाया कि मूर्तियों के 'पीडम' (पीठिका/बेस) मंदिर से गायब हैं।
- यह बात सामने आने के बाद केरल हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया।
(पीडम या पीठम दक्षिण भारत में उस बेस को कहते हैं जिसपर किसी देवता या देवी की मूर्ति रखी होती है। यह किसी भी धातु की हो सकती है या इसपर सोने की परत चढ़ाई जाती है।)

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला गोल्ड हेराफेरी मामले की सुनवाई के दौरान त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) की घोर लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने अब तक इस मामले में तीन सुनवाई की है।
कीमती सामान का अपूर्ण रिकॉर्ड
29 सितंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि TDB ने मंदिर के कीमती सामान का सही रजिस्टर नहीं रखा, जिससे गड़बड़ियों को छिपाने में मदद मिली।
- रिकॉर्ड की कमी: कोर्ट ने पाया कि भक्तों के चढ़ाए गए आभूषणों और सिक्कों का रिकॉर्ड तो रजिस्टर में रखा जाता है, जिसमें विवरण, तारीख और गुणवत्ता दर्ज होती है।
- लापता रिकॉर्ड: लेकिन 'कोडीमारम' (ध्वज स्तंभ), 'द्वारपालक' मूर्तियाँ, और 'पीडम' (मूर्ति का आधार) जैसी अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि इन सामानों को किसी को देने की कोई एंट्री नहीं है। इसके अलावा, जब द्वारपालक मूर्तियों को दोबारा लगाया गया, तो उनका वजन भी रिकॉर्ड नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे जानबूझकर की गई चूक बताया, ताकि मूर्तियों में हुई 4 किलो सोने की कमी सामने न आ पाए।
छत पर चढ़े सोने का भी रिकॉर्ड गायब
कोर्ट ने 1999 में श्रीकोविल की छत पर सोने की परत चढ़ाने के काम से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई:
- रजिस्टर गायब: इस काम का रजिस्टर भी गायब है।
- सोने की मात्रा: कारीगरों के अनुसार, उस समय 30 किलोग्राम से ज़्यादा सोना इस्तेमाल हुआ था, लेकिन इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
अदालत ने अब TDB को निर्देश दिया है कि वह विशेषज्ञों की मदद से मंदिर की सभी कीमती चीज़ों की पूरी इन्वेंटरी और मूल्यांकन करवाए। साथ ही, देवस्वम बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही की भी विस्तृत जाँच की जाए।मामले की अगली सुनवाई अब अक्टूबर के अंत में होगी।