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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट पर अस्थायी रोक लगा दी है। कोर्ट ने 26 मई को जारी 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025' के तहत गठित समिति के संचालन को निलंबित कर दिया है। इस अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका को अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा गया है।

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मामले की पूरी जानकारी:

  • 15 मई का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने पहले यूपी सरकार को मंदिर के पैसे का इस्तेमाल करके कॉरिडोर बनाने और मंदिर के आसपास 5 एकड़ जमीन खरीदने की इजाजत दी थी। इसके लिए शर्त यह थी कि जमीन भगवान ठाकुरजी के नाम पर ही रजिस्टर्ड होगी।
  • 26 मई का अध्यादेश: इस फैसले के बाद, यूपी सरकार ने 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025' जारी किया। इसके तहत, मंदिर की देखभाल और भक्तों की सुविधाओं के लिए एक ट्रस्ट (न्यास) बनाने की व्यवस्था की गई। इस ट्रस्ट में 11 मनोनीत सदस्य और 7 पदेन सदस्य होने थे।
  • याचिकाएं और विरोध: इस अध्यादेश के खिलाफ 27 मई को मंदिर के सेवायत (गोस्वामी परिवार) और व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाएं दायर कीं। उनका कहना था कि सरकार का यह कदम मंदिर के निजी चरित्र में हस्तक्षेप है।
  • सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश: शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले पर कोई फैसला नहीं लेता, तब तक अध्यादेश के तहत बनी समिति काम नहीं करेगी।
  • अंतरिम व्यवस्था: कोर्ट ने मंदिर की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक अंतरिम समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। इसमें कुछ सरकारी अधिकारी और गोस्वामी परिवार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जो मंदिर के पारंपरिक संरक्षक हैं।

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