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33 साल बाद परमाणु परीक्षण आखिरी परीक्षण: चट्टान पिघल गईं

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कथित तौर पर पेंटागन को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया था। यह टेस्टिंग चीन और रूस के समान स्तर पर होनी चाहिए।अमेरिका ने अंतिम परमाणु परीक्षण 23 सितंबर 1992 को किया था, जिसका कोडनेम 'डिवाइडर' था। यह 1,030वाँ अमेरिकी परीक्षण था।यह परीक्षण नेवादा टेस्ट साइट पर रेनियर मेसा पहाड़ी के 2300 फीट नीचे किया गया था, जिसका उद्देश्य विकिरण (रेडिएशन) के फैलाव को रोकना था।यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जमीन के नीचे की चट्टानें पिघल गईं और सतह लगभग 1 फुट ऊपर उठकर धंस गई। इस जगह पर आज भी लगभग 150 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा गड्ढा मौजूद है।1996 के 'कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी' (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाई गई थी।हालांकि अमेरिका और चीन दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसे अभी तक औपचारिक रूप से अनुमोदित  नहीं किया है।

जॉर्ज बुश और परमाणु परीक्षण पर रोक

  • उद्देश्य: पूर्ण परमाणु हथियार परीक्षण में वास्तविक परमाणु बम का विस्फोट किया जाता है।
  • मापन: इसका मुख्य उद्देश्य बम की विनाशक क्षमता, रेडिएशन (विकिरण) प्रभाव, और उसकी तकनीकी कार्यक्षमता को मापना होता है। इस प्रक्रिया में परमाणु प्रतिक्रिया होती है।
  • स्थान: ये परीक्षण ऐतिहासिक रूप से ज़मीन के अंदर (भूमिगत) या आकाश में किए जाते थे।
  • चिंता: ये परीक्षण एक बड़ा पर्यावरणीय और राजनीतिक मुद्दा हैं क्योंकि इनसे रेडिएशन फैलने का गंभीर खतरा होता है।
  • अमेरिका ने अपना अंतिम परमाणु परीक्षण 1992 में किया था।
  • इस अंतिम परीक्षण के बाद, तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने की घोषणा की थी। (इस रोक को 'मोरेटोरियम' भी कहा जाता है)।
  • रूस और चीन ने भी 1990 के दशक के बाद से पूर्ण परमाणु हथियार परीक्षण बंद कर दिए थे।
  • पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब इसी तरह के परीक्षणों को फिर से शुरू करने का निर्देश दे रहे हैं।
  • पेंटागन की स्थिति: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रम्प का आदेश वास्तविक विस्फोटक परीक्षण के लिए है, या यह केवल गैर-विस्फोटक परमाणु प्रक्रिया की जाँच से जुड़ा है।
  • विशेषज्ञों का मत: अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश अभी तक पूर्ण विस्फोटक परीक्षण की शुरुआत नहीं, बल्कि केवल तैयारी या एक संकेत है।
  • CTBT का प्रभाव: अमेरिका ने कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (CTBT) पर हस्ताक्षर किए हैं (भले ही इसे औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया हो), जो पूर्ण विस्फोट परीक्षणों के रास्ते में एक बड़ी राजनीतिक बाधा है।

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रेडिएशन का घातक परिणाम

  • 6.9 लाख मौतें: यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के अर्थशास्त्री कीथ मेयर्स द्वारा 2017 में किए गए एक शोध के अनुसार, अमेरिका में पहले हुए परमाणु परीक्षणों से फैले रेडिएशन (विकिरण) के कारण लगभग 6.9 लाख अमेरिकी नागरिकों की मृत्यु हुई या उनके स्वास्थ्य पर गंभीर दीर्घकालिक असर पड़ा।
  • वैज्ञानिकों का मत: कई वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, जैसे कि बिना धमाका किए उन्नत जाँच पद्धतियों का उपयोग करके भी परमाणु हथियारों के भंडार की स्थिति को बनाए रखा जा सकता है और उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। यह उन अमेरिकी सांसदों की राय के विपरीत है जो मानते हैं कि बिना नए परीक्षणों के हथियार भंडार कमजोर हो जाएगा।

🇰🇵 21वीं सदी में स्थिति

  • एकमात्र परीक्षक: 21वीं सदी में अब तक केवल उत्तर कोरिया ने ही परमाणु परीक्षण किए हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय दबाव: अमेरिका और दक्षिण कोरिया लगातार उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन पर परमाणु हथियार छोड़ने और शांति वार्ता की ओर बढ़ने का दबाव बना रहे हैं।

ट्रम्प ने आदेश को सही ठहराया

पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने 33 साल बाद परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के अपने आदेश को यह कहकर उचित ठहराया:

  • प्रतिस्पर्धा का तर्क: उन्होंने दावा किया कि "रूस और चीन दोनों ऐसा कर रहे हैं," इसलिए अमेरिका को भी करना चाहिए, भले ही अमेरिका के पास पहले से ही सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हों।
  • नियंत्रण का दावा: जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे दुनिया एक अधिक खतरनाक परमाणु माहौल में जाएगी, तो ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि "हमने इसे काफी हद तक नियंत्रण में रखा है।"
  • निरस्त्रीकरण की बात: ट्रम्प ने परमाणु निरस्त्रीकरण देखने की इच्छा भी व्यक्त की और कहा कि वे इस संबंध में रूस और चीन के साथ बातचीत करना चाहेंगे।

तैयारी का समय: अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के आदेश देने के बाद भी अमेरिका को वास्तविक परमाणु हथियार परीक्षण करने में लगभग 24 से 36 महीने (2 से 3 साल) तक का समय लग सकता है।

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रूस का न्यूक्लियर पावर्ड मिसाइल टेस्ट

टेस्ट की तारीख: रूस ने 21 अक्टूबर को एक न्यूक्लियर पावर्ड मिसाइल (परमाणु शक्ति से चलने वाली मिसाइल) का परीक्षण किया।

ट्रम्प की प्रतिक्रिया: पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस कदम को "गलत" बताया। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिसाइल परीक्षण करने के बजाय उस जंग को समाप्त करने पर ध्यान देने को कहा जो "एक हफ्ते में खत्म होने वाली जंग के 4 साल" पूरे करने वाली है।

परमाणु हथियारों की संख्या पर भ्रम

  • ट्रम्प का दावा: ट्रम्प ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट में यह गलत दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया में किसी भी अन्य देश से अधिक परमाणु हथियार हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय तथ्य: अंतर्राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, यह दावा गलत है। ‘इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस’ (ICAN) के मुताबिक

    रूस के पास सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं, जिनकी संख्या 5,500 से ज़्यादा है।अमेरिका के पास लगभग 5,044 परमाणु हथियार हैं।

    🇨🇳 चीनी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के आदेश पर चीन के सोशल मीडिया यूज़र्स ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी, जिसमें हैरानी और कुछ हद तक उत्साह दोनों शामिल थे:

    वीबो यूज़र 1: "ठीक है, ठीक है, अगर वे (अमेरिका) परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेंगे, तो हम भी करेंगे!"

    वीबो यूज़र 2: "हम तो बस उनके पहला कदम उठाने का इंतजार कर रहे थे; अब जो होगा, वो उनके कंट्रोल से बाहर होगा।"

    मज़ाक उड़ाना: एक यूज़र ने अमेरिका का मज़ाक उड़ाते हुए लिखा, "अमेरिका की मौजूदा हालत देखकर तो डर लगता है कि कहीं वो टेस्ट करते वक्त खुद को ही उड़ा न लें।"


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