उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन उस क्षण का साक्षी बना, जिसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया।
यह समारोह इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने छोटे पुत्र अभिमन्यु यादव का विवाह यहीं आम जनता के बीच, बिल्कुल सादगी से करवाकर ऐसा उदाहरण पेश किया जिसकी प्रशंसा हर ओर हो रही है।

जहाँ कई नेता अपने बच्चों के विवाह को भव्य मंच और करोड़ों खर्च के साथ “राजसी ठाट” में मनाते हैं, वहीं डॉ. मोहन यादव ने दिखा दिया कि एक सच्चा जनसेवक अपने कर्मों से जनता के दिल जीतता है, दिखावे से नहीं।
डॉ. मोहन यादव—जनता से जुड़े, धरातल पर खड़े जननेता
पूरे विवाह आयोजन में मुख्यमंत्री किसी VIP की तरह नहीं, बल्कि एक साधारण पिता की तरह दिखाई दिए—
✔ व्यवस्थाओं का खुद निरीक्षण
✔ भोजन, बैठने से लेकर हर छोटे-बड़े इंतज़ाम पर नज़र
✔ सभी 21 जोड़ों के पास जाकर आशीर्वाद
✔ मंच पर न्योछावर नहीं, विनम्र उपस्थिति
उनकी यह शैली बताती है कि नेतृत्व केवल सत्ता से नहीं, संस्कारों और व्यवहार से परिभाषित होता है।
सामूहिक विवाह सम्मेलन—समानता और समरसता का बड़ा संदेश


इस आयोजन में विभिन्न वर्गों और समुदायों के 21 जोड़ों ने एक ही मंडप में वैदिक विधि से विवाह संस्कार पूरे किए।
धार्मिक अनुष्ठान बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और योगगुरु बाबा रामदेव की उपस्थिति में सम्पन्न हुए।

डॉ. मोहन यादव का यह कदम उस विचारधारा को मजबूती देता है—
▶ हर वर्ग, हर जाति को समान अधिकार
▶ सादगी ही असली शान
▶ भेदभाव की विदाई—समरसता की शुरुआत

सामूहिक विवाह सम्मेलन के प्रमुख फायदे
1️⃣ आर्थिक बोझ कम होता है-
ग़रीब और मध्यमवर्गीय परिवार, बिना किसी दबाव के, बेटियों की शादी कर पाते हैं।
2️⃣ दिखावा और फिजूलखर्ची खत्म-
शादी अपने असली रूप—सरल और संस्कारपूर्ण—में सम्पन्न होती है।
3️⃣ सामाजिक एकता को बढ़ावा-
अलग-अलग समाज एक मंच पर आकर भाईचारे का संदेश देते हैं।
4️⃣ सरकारी व सामाजिक सहयोग उपलब्ध-
NGO, समाजसेवी संस्थाओं और शासन से आवश्यक मदद मिलती है।
5️⃣ समय और संसाधनों की बचत-
एक ही आयोजन में कई विवाह सम्पन्न होने से व्यवस्था सरल होती है।
6️⃣ नवदंपति को आवश्यक सामग्री-
आयोजक द्वारा कपड़े, घरेलू सामान आदि दिए जाते हैं।
7️⃣ धार्मिक विधियों का शास्त्रसम्मत पालन-
विशेषज्ञ पुरोहितों के माध्यम से संस्कार परंपरागत रूप से सम्पन्न होते हैं।

डॉ. मोहन यादव—जनता के दिलों में जगह बनाने वाला नेतृत्व
यह आयोजन सिर्फ विवाह नहीं था, बल्कि एक संदेश था—
कि नेतृत्व का असली अर्थ यही है कि
जनता के बीच रहकर, जनता जैसा बनकर, जनता के लिए कार्य किया जाए।
डॉ. मोहन यादव हर वर्ग—
चाहे लाड़ली बहना योजना हो, किसान, व्यापारी या मजदूर—
हर किसी के कल्याण के लिए निरंतर समर्पित रहते हैं।
उज्जैन के इस सामूहिक विवाह सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि
एक सच्चा राजा वह नहीं जो राजसी ठाट दिखाए,
बल्कि वह जो अपनी प्रजा के बीच खड़ा नज़र आए।