VIT सीहोर विवाद: छात्रों में भय, प्रशासन पर सवाल
सीहोर जिले के वीआईटी विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा विरोध और तोड़फोड़ की घटना की जांच के लिए मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने तीन सदस्यीय समिति गठित की। जांच रिपोर्ट में गंभीर बातें सामने आई हैं।

मुख्य निष्कर्ष:
विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में तानाशाही और डर का माहौल बनाए रखता था।
छात्रों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता था; आईकार्ड जब्त करना, परीक्षा में कम अंक देना, और भोजन व पेयजल की खराब गुणवत्ता जैसी समस्याएँ आम थीं।
पुलिस को विवाद की पहले से जानकारी थी, लेकिन घटना की रात दो बजे तक उन्हें सूचना नहीं दी गई।

जांच समिति की सिफारिशें:
निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों की शिकायतों के लिए यूजीसी की तरह लिंक या प्रकोष्ठ की स्थापना।
छात्रों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग विभागीय शिकायतें दर्ज करने की व्यवस्था।
बड़े छात्रावास परिसर में आयोग के प्रतिनिधियों की नियुक्ति और विश्वविद्यालय में नियमित निरीक्षण।
स्वास्थ्य केंद्र में उच्च गुणवत्ता की सुविधाओं और रिकार्ड रखने का आदेश।
छात्रावासों और मेस में भोजन और पेयजल की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण।

घटना का कारण:
खराब पानी और भोजन की गुणवत्ता के कारण छात्रों में गुस्सा बढ़ा।
कई छात्र पीलिया जैसी बीमारियों से प्रभावित हुए; कुछ की अस्पताल में भर्ती और कुछ की मौत हुई।
छात्रों के विरोध और गार्डों द्वारा मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद परिसर में हंगामा भड़क गया।
छात्र बसें और वाहनों में आग लगाकर हंगामा किया, जिसके बाद प्रशासन को 5 थानों की पुलिस तैनात करनी पड़ी।

समस्या के निवारण पर जोर:
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों के मन में डर और प्रताड़ना नहीं रहनी चाहिए। विश्वविद्यालयों को छात्रों की शिकायतों का प्रभावी समाधान करने के लिए बाध्य किया जाए।

परिसर का हाल:
वीआईटी विश्वविद्यालय एक किले की तरह है, जहां प्रबंधन का खुद का कानून चलता है। घटना के दौरान प्रशासन ने निर्णय लेने में देरी की, जिससे स्थिति बिगड़ी।