
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “भारत का संचालन केवल संविधान से होगा, न कि गीता, कुरान या किसी धार्मिक ग्रंथ से। देश धर्मनिरपेक्ष है और रहेगा।” उन्होंने भागवत के बयान को मुस्लिम समुदाय का अपमान बताते हुए कहा कि यह भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
इमाम एसोसिएशन ने साफ कर दिया कि वे पर्सनल लॉ खत्म नहीं होने देंगे और इस मुद्दे पर किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि भारत में सभी धर्मों को समान अधिकार मिले हैं और किसी भी धर्म को राष्ट्र पर थोपने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इससे पहले भागवत ने कहा था कि भारत मूल रूप से हिंदू राष्ट्र है, जिस पर कई राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।