मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत का कारण बने जहरीले 'कोल्ड्रिफ कफ सिरप' बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है।मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने बुधवार रात चेन्नई में दबिश देकर रंगनाथन को पकड़ा। SIT ने कंपनी से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाओं के नमूने और प्रोडक्शन रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
- रंगनाथन पर ₹20,000 का इनाम घोषित था और वह अपनी पत्नी के साथ फरार चल रहा था।
- चेन्नई में उनका 2,000 वर्ग फुट का अपार्टमेंट सील कर दिया गया था, और रजिस्टर्ड ऑफिस बंद मिला था।
- छिंदवाड़ा एसपी के अनुसार, SIT, रंगनाथन को चेन्नई कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड मांगेगी, जिसके बाद उसे छिंदवाड़ा लाया जाएगा।
- इस मामले की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई कर सकता है। याचिका में CBI या विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग की गई है।
मृतक बच्चों की संख्या और सरकारी कार्रवाई
- जहरीले कफ सिरप पीने के बाद किडनी फेल होने से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है।
- बुधवार देर रात छिंदवाड़ा के एक 3 वर्षीय बच्चे मयंक सूर्यवंशी ने नागपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज नागपुर जाएंगे और अस्पतालों में भर्ती चारों बच्चों का हाल जानेंगे तथा उनके परिजनों से मुलाकात करेंगे।
- सीएम ने कहा है कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और सभी बच्चों का इलाज सरकार कराएगी, साथ ही किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
जांच में बड़ा खुलासा: केमिकल खरीद में अनियमितता
- तमिलनाडु डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की रिपोर्ट में सामने आया है कि यह सिरप नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल से तैयार किया गया था।
- जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने 100 किलो जहरीला केमिकल (प्रोपलीन ग्लायकॉल) खरीदा था, लेकिन इसकी खरीद का न कोई बिल मिला है और न ही कोई एंट्री की गई है।
- मालिक ने जांच अधिकारियों को बताया कि भुगतान नकद या गूगल पे (G-Pay) के जरिए किया गया था, जिससे अनियमितता की पुष्टि होती है।
स्थानीय स्तर पर संवेदना और सहयोग
- छिंदवाड़ा महापौर विक्रम अहके ने बच्चों की मौतों के कारण अपना जन्मदिन न मनाने का फैसला किया है।
उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि वे केक, उपहार और आतिशबाजी पर खर्च होने वाली राशि को इकट्ठा कर एक बॉक्स में डालें, ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहयोग दिया जा सके।

बच्चों की मौत का कारण बने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की लैब जांच में खतरनाक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सिरप में ज़हरीले रसायनों की मात्रा सुरक्षित सीमा से 486 गुना अधिक पाई गई है।
केमिकल की मात्रा और उसका प्रभाव
- सिरप की लैब जांच में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे ज़हरीले रसायन पाए गए हैं।
- इन रसायनों की मौजूदगी दवा में तय सीमा से 486 गुना अधिक थी।
- एक विशेषज्ञ ने बताया कि यह अत्यधिक मात्रा न केवल बच्चों के लिए जानलेवा है, बल्कि यह हाथी जैसे विशाल जानवर की भी किडनी और दिमाग को नष्ट करने की क्षमता रखती है।
घटिया केमिकल खरीद और दस्तावेज़ छिपाने का प्रयास
जांच में सामने आया है कि दवा निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मा ने न सिर्फ घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया, बल्कि रिकॉर्ड भी छुपाने की कोशिश की:
- मार्च में खरीदी: कंपनी ने 25 मार्च 2025 को चेन्नई की सनराइज बायोटेक से प्रोपलीन ग्लायकॉल खरीदा था।
- घटिया क्वालिटी: खरीदा गया केमिकल नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड का था, यानी दवा बनाने के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं था।
- टेस्टिंग नहीं: कंपनी ने इस घटिया केमिकल की शुद्धता या इसमें ज़हरीले DEG/EG की मात्रा का कोई परीक्षण नहीं कराया।
- रिकॉर्ड गायब: सबसे बड़ी अनियमितता यह है कि कंपनी के पास घटिया केमिकल की खरीद का न कोई बिल है और न ही प्रयोग किए गए केमिकल का कोई रिकॉर्ड मौजूद है।
- दस्तावेज़ छिपाना: तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट के निरीक्षण के दौरान, कंपनी के पास प्रोपलीन ग्लायकॉल का कोई स्टॉक नहीं मिला। जांच अधिकारियों को संदेह है कि कंपनी ने अपने अपराध को छुपाने के लिए जल्दबाजी में केमिकल को खत्म कर दिया और दस्तावेज़ों को छिपाने की कोशिश की।

तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल से बनी दवाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं और बच्चों व वयस्कों दोनों के लिए जानलेवा हो सकती हैं।
श्रीसन फार्मास्युटिकल्स पर दबिश के दौरान जांच दल को ज़हरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़ी एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली है।
- तैयार थीं 589 बॉटल: जांच टीम को कोल्ड्रिफ सिरप के बैच नंबर SR-13 की 60 एमएल की 589 बॉटलें मिली थीं, जिन्हें छिंदवाड़ा भेजने के लिए पैक किया गया था।
- मौत का कारण बना यही बैच: बच्चों की किडनी फेल होने और ब्रेन में सूजन (जो उनकी मौत का कारण बनी) इसी बैच नंबर SR-13 के सिरप पीने से हुई थी।
- निर्माण और एक्सपायरी डेट: इन ज़हरीले सिरप को मई 2025 में तैयार किया गया था और इनकी एक्सपायरी डेट अप्रैल 2027 थी।
