कृत्रिम बारिश का प्रयोग: अमेरिका और बेंगलुरु की कंपनी का सहयोग
अमेरिका और बेंगलुरु की कंपनी जैनेक्स एआई, कृषि विभाग के साथ मिलकर यह प्रयोग कर रही है। इस पहल को केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों से मंजूरी मिल चुकी है। कृषि विभाग, मौसम विभाग और जिला प्रशासन ने जुलाई में ही इसे हरी झंडी दे दी थी। साथ ही, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन से भी जरूरी अनुमति मिल गई है।
वैज्ञानिकों की टीम कई दिनों से जयपुर में है और लगातार ड्रोन से कृत्रिम बारिश का परीक्षण कर रही है। अब तक हमारे देश में क्लाउड सीडिंग के लिए प्लेन का इस्तेमाल किया जाता था। यह पहली बार है जब ड्रोन का उपयोग एक छोटे और सीमित क्षेत्र में ऐसा प्रयोग करने के लिए किया जा रहा है।

जयपुर में ड्रोन से कृत्रिम बारिश का प्रयोग टला
जयपुर के रामगढ़ बांध इलाके में आज (मंगलवार) ड्रोन से कृत्रिम बारिश करवाने का प्रयोग किया जाना था, लेकिन भारी भीड़ की वजह से इसे रोक दिया गया। सरकार और एक निजी कंपनी के सहयोग से यह प्रयोग किया जा रहा था, जिसकी शुरुआत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को करनी थी।
भीड़ बनी बाधा
कृत्रिम बारिश की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग रामगढ़ बांध के पास जमा हो गए। भीड़ को देखते हुए, प्रयोग करने वाली कंपनी एक्सेल-1 के वैज्ञानिकों ने ड्रोन को पैक कर लिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी भीड़ के बीच ड्रोन उड़ाना संभव नहीं है। फिलहाल, पुलिस लोगों को वहां से हटाने की कोशिश कर रही है।

तकनीकी चुनौती भी
एक्सेल-1 कंपनी के मुख्य जलवायु इंजीनियर अधिकारी डॉ. एन साई भास्कर रेड्डी ने बताया कि ड्रोन को 400 फीट तक उड़ाया जाना है। हालांकि, बादलों की रेंज इससे ऊपर बताई जा रही है, जो क्लाउड सीडिंग (मौसम में बदलाव कर बारिश कराने की तकनीक) के इस प्रयोग में एक बड़ी चुनौती है।
बता दें कि यह प्रयोग पहले 31 जुलाई को होना था, लेकिन भारी बारिश की चेतावनी के कारण इसे टाल दिया गया था।
