केरल हाईकोर्ट ने 2005 के उदयकुमार हिरासत में मौत मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए चार पूर्व पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया है। निचली अदालत ने 2018 में इनमें से दो को मौत की सज़ा सुनाई थी।यह मामला साल 2005 का है, जब 28 वर्षीय उदयकुमार को तिरुवनंतपुरम के श्रीकंतेश्वरम पार्क से पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप था कि पुलिस पूछताछ के दौरान उसे बेरहमी से प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उसी रात 11:40 बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उसकी मौत हो गई।हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले की CBI जांच पक्षपातपूर्ण थी और एजेंसी ने सही तरीके से जांच नहीं की। कोर्ट ने CBI पर जांच के दौरान गवाहों पर दबाव बनाने, अदालत में गलत रिपोर्ट पेश करने और निचली अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद उच्च न्यायालय में अपील करने का आरोप लगाया।

अब तक की घटनाक्रम
- 2005: उदयकुमार की हिरासत में मौत के बाद 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
- 2005: मृतक के परिवार की याचिका पर मामले की जांच CBI को सौंपी गई।
- 2018: निचली अदालत ने चार पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और दो को फांसी की सज़ा सुनाई।
2025: केरल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए चारों पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया।
मणिपुर पुलिस ने 26 और 27 अगस्त को इंफाल और माओहिंग-चांगौबुंग के जंगलों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में कई महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं।पुलिस ने माओहिंग-चांगौबुंग के जंगलों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। बरामद किए गए सामान में एक M16 राइफल, एक बुलेटप्रूफ जैकेट और कई हैंड ग्रेनेड शामिल हैं।इस ऑपरेशन के दौरान, इंफाल के पास दो उग्रवादी संगठनों, KCP-PWG और KYKL, से जुड़े तीन उग्रवादियों को भी पकड़ा गया। इन उग्रवादियों पर कई गंभीर आरोप हैं, जिनमें वसूली, अपहरण, गोलीबारी और हथियारों की तस्करी शामिल हैं।मणिपुर पुलिस ने 27 अगस्त, बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस सफल ऑपरेशन की जानकारी साझा की। यह कार्रवाई राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है।
गुजरात हाई कोर्ट के वकील एक जज, जस्टिस संदीप भट्ट के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तावित तबादले का विरोध कर रहे हैं। इस विरोध में बुधवार को गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (GHCAA) ने न्यायिक कार्य नहीं किया।

विरोध का कारण और कार्रवाई
- तबादले का प्रस्ताव: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने विभिन्न हाई कोर्ट के 14 जजों के तबादले की सिफारिश की है, जिनमें से दो गुजरात हाई कोर्ट के हैं। जस्टिस संदीप एन. भट्ट को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में और जस्टिस रॉय को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है।
- एसोसिएशन का विरोध: वकीलों का संगठन जस्टिस भट्ट के तबादले के खिलाफ है। उनके विरोध के कारण उन्होंने अदालती कामकाज बंद रखा।
समिति का गठन: GHCAA ने इस मामले को देखने के लिए एक छह सदस्यीय समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता बृजेश त्रिवेदी कर रहे हैं। त्रिवेदी ने कहा कि वे इस तबादले का विरोध करते हैं और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यह कदम उठाया गया है।
यह मामला न्यायपालिका में तबादलों की प्रक्रिया और वकीलों के विरोध के अधिकार को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने शिकायतकर्ता चिन्मय के खिलाफ जालसाजी, झूठी गवाही और सबूत गढ़ने के आरोपों में 10 नए केस दर्ज किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
- चिन्मय का दावा: चिन्मय ने 11 जुलाई को मजिस्ट्रेट के सामने दावा किया था कि धर्मस्थल मंदिर में कई लोगों को दफनाया गया है। उसने कहा था कि उसने 1998 से 2014 तक मंदिर में काम किया और उस पर दबाव डालकर 100 से ज्यादा महिलाओं और बच्चियों के शवों को दफन करवाया गया।
पेश किए गए सबूत: उसने अपने दावे के समर्थन में एक खोपड़ी और कुछ हड्डियां पेश कीं, और कहा कि ये एक यौन शोषण की शिकार महिला के अवशेष हैं।
SIT का खुलासा
- फॉरेंसिक रिपोर्ट: फॉरेंसिक जांच में सामने आया कि जो अवशेष चिन्मय ने पेश किए थे, वे किसी महिला के नहीं, बल्कि एक पुरुष के थे।
- खुदाई में कुछ नहीं मिला: चिन्मय के दावों के आधार पर SIT ने अब तक 17 जगहों पर खुदाई की है, लेकिन केवल 2 जगहों से ही पुरुषों के कंकाल मिले हैं। महिलाओं या बच्चियों के शवों का कोई भी सबूत नहीं मिला है।
चिन्मय हिरासत में: SIT का दावा है कि चिन्मय झूठे सबूत बना रहा था। वह पिछले 5 दिनों से SIT की हिरासत में है और उसी दौरान उस पर ये नए केस दर्ज किए गए हैं।
