'मिशन गगनयान' में शामिल अंतरिक्ष यात्री, शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष मिशन के दौरान लगने वाले डर के बारे में खुलकर बात की है।उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष मिशन में डर तो लगता है, लेकिन जब आपके पीछे एक ऐसी भरोसेमंद टीम होती है, जिसे आप अपनी जिंदगी सौंप देते हैं, तब यह डर कम हो जाता है।”शुक्ला ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी टीम पर पूरा भरोसा होता है, और यह भरोसा ही उन्हें किसी भी मुश्किल स्थिति का सामना करने की हिम्मत देता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के पास अपने मिशन के दौरान पल-पल की जानकारी होती है और वे हर स्थिति के लिए तैयार रहते हैं।

एयरोस्पेस इंजीनियर और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक्सियम मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में दो हफ्ते बिताए। उन्होंने कहा, "मैं इस मिशन का पायलट और कमांडर था, और सभी सिस्टम को कमांड कर रहा था।"
अपने दो हफ्ते के प्रवास के दौरान, उन्होंने कई प्रयोग किए और तस्वीरें लीं, जिसके लिए उन्होंने विशेष ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने इस अनुभव को अविस्मरणीय बताया।
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शुक्ला ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि डर नहीं लगता। उन्होंने कहा, "डर सबको लगता है, लेकिन हमारे पीछे एक भरोसेमंद टीम होती है, जिसे हम अपनी जिंदगी सौंप देते हैं।"
गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशन का फायदा केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में रहकर जो अतिरिक्त ज्ञान मिलता है, वह अमूल्य है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में उन्होंने जो भी जानकारी हासिल की है, वह गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे भविष्य के मिशनों के लिए बहुत उपयोगी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत बहुत जल्द अपने खुद के रॉकेट और कैप्सूल से किसी को अंतरिक्ष में भेजेगा। अंतरिक्ष में रहने का अनुभव जमीन पर मिली ट्रेनिंग से बिल्कुल अलग होता है, क्योंकि शरीर कई बदलावों से गुजरता है। 20 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने के बाद, शरीर गुरुत्वाकर्षण में रहने का अभ्यस्त हो जाता है।

शुभांशु शुक्ला से 5 सवाल-जवाब
1. आपने जो प्रयोग किए हैं, उनकी क्या प्रगति है?
जवाब: उन प्रयोगों पर अभी काम चल रहा है। डेटा के विश्लेषण और अंतिम नतीजों के बिना कुछ भी कहना संभव नहीं है। उम्मीद है कि कुछ महीनों में सब कुछ सामने आ जाएगा।
2. गगनयान मिशन की ट्रेनिंग एक्सियम मिशन से कितनी अलग है?
जवाब: हमने रूस, भारत और अमेरिका में ट्रेनिंग ली है। इन सभी जगहों पर ट्रेनिंग का सेटअप भले ही अलग हो, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही है। हाँ, ट्रेनिंग का तरीका अलग-अलग है।
3. एक्सियम मिशन से क्या सीखा जो गगनयान मिशन में काम आएगा?
जवाब: मानव अंतरिक्ष मिशन में इंसान की जिंदगी जुड़ी होती है। हमें किताबों से जो ट्रेनिंग दी जाती है, हकीकत उससे थोड़ी अलग होती है। इस मिशन से हमने सीखा कि सैद्धांतिक ज्ञान से इतर, वास्तविक अनुभव कितना अलग होता है।
4. रॉकेट के उड़ान भरने पर आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आया?
जवाब: मैं बहुत उत्साहित था। हालाँकि ये मिशन जोखिम भरे होते हैं, लेकिन हमें इसका अंदाजा होता है। आम जिंदगी में भी कहीं न कहीं जोखिम होता ही है, इसलिए मैंने इसे संभाला। इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की तुलना में अंतरिक्ष मिशन के विफल होने की दर काफी कम है।
5. आपने इस अनुभव को अविश्वसनीय बताया है, यह अनुभव गगनयान में कैसे काम आएगा? कठिन समय में किसे याद करते हैं?
जवाब: हम ट्रेनिंग के दौरान सोचते हैं कि मिशन कैसा होगा, लेकिन जब लॉन्चिंग का समय आता है, तो उस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
