नेपाल में 8 सितंबर से शुरू हुई हिंसा और राजनीतिक अशांति के कारण सैकड़ों भारतीय वहां फंस गए हैं। इन लोगों में पर्यटक, मरीज और उनके परिवार वाले शामिल हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी हैं। इन्होंने अपनी आँखों से आगजनी, हिंसक प्रदर्शन और गोलीबारी देखी है। पिछले तीन दिनों से दहशत में जी रहे ये लोग जल्द से जल्द भारत लौटना चाहते हैं।

नेपाल में चल रही हिंसा के बीच, गुजरात के 300 से अधिक लोग वहाँ फँसे हुए हैं, जिनमें राजकोट और अहमदाबाद के निवासी भी शामिल हैं। इन लोगों ने स्थानीय होटलों और वृद्धाश्रमों में शरण ली है।इनमें सूरत नेशनल बैंक के निदेशक देवांगभाई चोकसी और उनका परिवार भी शामिल है। उन्होंने एक वीडियो कॉल के जरिए सूरत के सांसद मुकेश दलाल से बात की और वहाँ की डरावनी स्थिति बताई। चोकसी के अनुसार, 10 सितंबर तक हर तरफ आगजनी और हिंसा हो रही थी। जिस होटल में वे ठहरे थे, वहाँ भी बिजली नहीं थी, जिससे हर पल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसा महसूस हो रहा था।

नेपाल में जारी हिंसा के कारण जयपुर के करीब 500 लोग, जो तीन धाम की यात्रा पर गए थे, वहीं फँस गए हैं। इनमें से एक समूह की बस 8 सितंबर को पत्थरबाजी का शिकार हुई, जिससे बस को नुकसान पहुँचा, लेकिन सभी यात्री सुरक्षित रहे। ये लोग 6-7 सितंबर की रात को नेपाल पहुँचे थे और हिंसा शुरू होने के बाद होटलों में रुक गए।जयपुर के लगभग 200 यात्री 9 सितंबर से काठमांडू एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। भास्कर की टीम से वीडियो कॉल पर बात करते हुए जयपुर के सत्तार खान ने बताया कि वे वहाँ से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सेना ने उन्हें रोक दिया। सभी उड़ानें रद्द होने के कारण वे एयरपोर्ट पर ही फंसे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्हें भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि यहाँ चीजें बहुत महंगी हैं और अब तो भूखे मरने की नौबत आ गई है।
भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 726 किलोमीटर बिहार से जुड़ी हुई है। यह सीमा खुली है, जहाँ न तो कोई दीवार है और न ही कोई तारबंदी।नेपाल से बॉर्डर पार करके आए मोहम्मद इसराही ने वहाँ की भयावह स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि नेपाल में डर का माहौल है और वे दो दिनों से खौफ में जी रहे थे। उन्होंने अपनी आँखों के सामने 10 गाड़ियों को जलते देखा और उन्हें डर था कि उनकी गाड़ी को भी जला दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई ड्राइवर अभी भी वहाँ फँसे हुए हैं।रक्सौल निवासी अब्दुल्ला ने बताया कि वे नेपाल के जीतपुर से लगभग 20 किलोमीटर का सफर तय करके अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भारत वापस आए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ दूर तक गाड़ी मिली, लेकिन फिर भी उन्हें 4-5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। उनके साथ छोटे बच्चे थे, जिन्हें पैदल चलने में काफी परेशानी हुई।

दिल्ली की उपासना गिल, जो नेपाल में एक वॉलीबॉल लीग इवेंट होस्ट करने गई थीं, अपनी टीम के साथ वहाँ फँस गई हैं। उनकी टीम में हरियाणा के फरीदाबाद की कुछ लड़कियाँ भी शामिल हैं।उपासना ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि जिस समय हिंसा भड़की, वे एक स्पा में थीं और लोगों को डंडे लेकर उनके पीछे दौड़ते हुए देखा। उपासना के मुताबिक, जिस होटल में वे महिला खिलाड़ियों के साथ रुकी थीं, प्रदर्शनकारियों ने उसे भी जला दिया।जानकारी के अनुसार, नेपाल में वॉलीबॉल लीग का दूसरा सीजन 5 सितंबर से चल रहा था और इसके मैच 13 सितंबर तक होने थे।