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अमेरिका में शटडाउन जारी; डेमोक्रेट्स समर्थन देने को राजी नहीं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार चौथी बार फंडिंग बिल पास कराने में विफल रहे हैं, जिसके कारण अमेरिका में सरकारी शटडाउन का चौथा दिन शुरू हो गया है।

फंडिंग बिल की असफलता

  • सीनेट में वोटिंग: रिपब्लिकन समर्थित फंडिंग बिल को सीनेट में केवल 54 वोट मिले, जबकि इसे पास कराने के लिए 60 वोटों की आवश्यकता थी।
  • डेमोक्रेट्स का विरोध: वोटिंग के तुरंत बाद विपक्षी डेमोक्रेट्स सांसद हॉल छोड़कर चले गए। डेमोक्रेट्स इस बिल का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि कोविड-19 के दौरान दी गई टैक्स क्रेडिट्स (हेल्थ केयर सब्सिडी) को बढ़ाया जाए, ताकि लाखों अमेरिकी नागरिकों को सस्ता स्वास्थ्य बीमा मिल सके।

शटडाउन की स्थिति और आगे की आशंका

  • शटडाउन की शुरुआत: अमेरिका में यह शटडाउन मंगलवार को वोटिंग के बाद बुधवार से लागू हुआ था, जिसके चलते सरकारी संस्थान फिलहाल बंद हैं।
  • अगली वोटिंग: NBC की रिपोर्ट के अनुसार, सीनेट में अब सोमवार से पहले कोई वोटिंग नहीं होगी। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) भी अगले हफ्ते की सभी वोटिंग 14 अक्टूबर तक के लिए रद्द कर चुका है।
  • लंबा शटडाउन: इन स्थगनों के कारण, अब अमेरिका में 14 अक्टूबर तक शटडाउन रहने की आशंका है।
  • सरकारी कर्मचारियों पर असर: अमेरिकी सरकार ने इस दौरान करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को छुट्टी (फरलो) पर भेज दिया है। इनमें से 3 लाख कर्मचारियों की छँटनी होने की भी आशंका है।

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    राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए फंडिंग बिल पास कराना इसलिए मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उन्हें विपक्षी डेमोक्रेट्स के समर्थन की आवश्यकता है, जो फिलहाल सहयोग देने को तैयार नहीं हैं।

    सीनेट में गणित

  • कुल सदस्य: 100
  • रिपब्लिकन: 53
  • डेमोक्रेट्स: 47
  • समर्थन की आवश्यकता: बिल पास कराने के लिए 60 वोटों की जरूरत है।
  • स्थिति: दो निर्दलीय सांसदों के समर्थन के बावजूद, रिपब्लिकन पार्टी को बिल पास कराने के लिए डेमोक्रेट्स के वोटों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, लेकिन वे बिल के पक्ष में वोट देने को राजी नहीं हैं।

    दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप

  • रिपब्लिकन का आरोप: रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने आरोप लगाया है कि डेमोक्रेट्स अपने कट्टर समर्थकों के दबाव में आकर सरकार को बंद कर रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि इस वजह से सेना, सीमा एजेंट (बॉर्डर एजेंट), और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जैसे महत्वपूर्ण कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं।
  • डेमोक्रेट्स का पलटवार: डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने पलटवार करते हुए कहा है कि ट्रम्प ही शटडाउन के लिए जिम्मेदार हैं। उनका आरोप है कि ट्रम्प अमेरिका के हेल्थ केयर प्रोग्राम को सुरक्षित करने से इनकार कर रहे हैं।
  • अमेरिका में सरकारी शटडाउन जारी है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार चौथी बार फंडिंग बिल पास कराने में विफल रहे हैं। इसका मुख्य कारण डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच हेल्थ केयर सब्सिडी को लेकर सहमति न बन पाना है।

    सरकारी शटडाउन क्या है?

    अमेरिकी सरकार को हर साल अपना बजट संसद से पास कराना होता है। अगर संसद (सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) बजट पर सहमत नहीं हो पाती है, तो फंडिंग बिल पास नहीं होता और सरकार को मिलने वाला पैसा रुक जाता है।

    परिणाम: इस स्थिति में, कुछ सरकारी विभागों और सेवाओं को पैसा नहीं मिल पाता है। नतीजतन, गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं को बंद कर दिया जाता है। इसी स्थिति को सरकारी शटडाउन कहा जाता है।

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    गतिरोध का मुख्य कारण: हेल्थ केयर प्रोग्राम

    वर्तमान शटडाउन की जड़ दोनों प्रमुख दलों के बीच ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम पर असहमति है:

    डेमोक्रेट्स की मांग: डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि हेल्थ केयर (स्वास्थ्य बीमा) की सब्सिडी बढ़ाई जाए, जिससे लाखों अमेरिकियों को सस्ता स्वास्थ्य बीमा मिल सके।

    रिपब्लिकन की चिंता: रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि सब्सिडी बढ़ाने से सरकारी खर्च बढ़ जाएगा, जिससे अन्य जरूरी सरकारी कार्यों के लिए पैसे की कमी हो सकती है।

    राष्ट्रपति ट्रम्प और डेमोक्रेटिक नेताओं ने सोमवार को व्हाइट हाउस में गतिरोध खत्म करने के लिए बैठक की थी, लेकिन यह बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।

    भविष्य की रणनीति और ट्रम्प का रुख

  • रिपब्लिकन की रणनीति: रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में आज देर रात एक बार फिर फंडिंग बिल पर वोट कराने की तैयारी में है। रिपब्लिकन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक डेमोक्रेट्स बिल को समर्थन नहीं देंगे, तब तक इसे रोज़ाना पेश किया जाएगा।
  • ट्रम्प का बयान: राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस शटडाउन के लिए सीधे तौर पर डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी भी दी है।
  • पिछला शटडाउन: अमेरिका में यह 2019 के बाद पहला सरकारी शटडाउन है। इससे पहले, ट्रम्प के कार्यकाल में ही 35 दिन का सबसे लंबा शटडाउन लगा था।

    अमेरिका में सरकारी शटडाउन जारी है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार चौथी बार फंडिंग बिल पास कराने में विफल रहे हैं। इसका मुख्य कारण डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच हेल्थ केयर सब्सिडी को लेकर सहमति न बन पाना है।

    सरकारी शटडाउन क्या है?

    अमेरिकी सरकार को हर साल अपना बजट संसद से पास कराना होता है। अगर संसद (सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) बजट पर सहमत नहीं हो पाती है, तो फंडिंग बिल पास नहीं होता और सरकार को मिलने वाला पैसा रुक जाता है।

    परिणाम: इस स्थिति में, कुछ सरकारी विभागों और सेवाओं को पैसा नहीं मिल पाता है। नतीजतन, गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं को बंद कर दिया जाता है। इसी स्थिति को सरकारी शटडाउन कहा जाता है।

    गतिरोध का मुख्य कारण: हेल्थ केयर प्रोग्राम

    वर्तमान शटडाउन की जड़ दोनों प्रमुख दलों के बीच ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम पर असहमति है:

  • डेमोक्रेट्स की मांग: डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि हेल्थ केयर (स्वास्थ्य बीमा) की सब्सिडी बढ़ाई जाए, जिससे लाखों अमेरिकियों को सस्ता स्वास्थ्य बीमा मिल सके।
  • रिपब्लिकन की चिंता: रिपब्लिकन पार्टी को डर है कि सब्सिडी बढ़ाने से सरकारी खर्च बढ़ जाएगा, जिससे अन्य जरूरी सरकारी कार्यों के लिए पैसे की कमी हो सकती है।

    राष्ट्रपति ट्रम्प और डेमोक्रेटिक नेताओं ने सोमवार को व्हाइट हाउस में गतिरोध खत्म करने के लिए बैठक की थी, लेकिन यह बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।

    भविष्य की रणनीति और ट्रम्प का रुख

  • रिपब्लिकन की रणनीति: रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में आज देर रात एक बार फिर फंडिंग बिल पर वोट कराने की तैयारी में है। रिपब्लिकन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक डेमोक्रेट्स बिल को समर्थन नहीं देंगे, तब तक इसे रोज़ाना पेश किया जाएगा।
  • ट्रम्प का बयान: राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस शटडाउन के लिए सीधे तौर पर डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी भी दी है।
  • पिछला शटडाउन: अमेरिका में यह 2019 के बाद पहला सरकारी शटडाउन है। इससे पहले, ट्रम्प के कार्यकाल में ही 35 दिन का सबसे लंबा शटडाउन लगा था।

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    अमेरिकी सरकार के मौजूदा शटडाउन से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फायदा और नुकसान दोनों होने की संभावना है, जो शटडाउन की अवधि पर निर्भर करता है।

    संभावित फायदे और एजेंडा को बढ़ावा

    सेवाओं को प्राथमिकता देना: शटडाउन के दौरान, ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के माध्यम से ट्रम्प प्रशासन के पास यह तय करने की शक्ति होती है कि कौन सी सेवाएँ 'जरूरी' हैं और कौन सी 'गैर-जरूरी'।ट्रम्प इस शक्ति का उपयोग डेमोक्रेट-समर्थित प्रोग्रामों (जैसे शिक्षा, पर्यावरण, और स्वास्थ्य सब्सिडी) को गैर-जरूरी घोषित करने के लिए कर सकते हैं, जबकि डिफेंस (रक्षा) और इमिग्रेशन (आप्रवासन) को जरूरी का दर्जा दे सकते हैं।

    एजेंडे को आगे बढ़ाना: ट्रम्प ने खुद कहा है कि शटडाउन से "कई अच्छी चीजें होंगी"। एक छोटा शटडाउन उन्हें अपने रूढ़िवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने और उन सरकारी खर्चों में कटौती करने का मौका दे सकता है जो उन्हें पसंद नहीं हैं।

    दोष मढ़ने की रणनीति: ट्रम्प इस शटडाउन का इस्तेमाल डेमोक्रेट्स पर दोष डालने के लिए कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे सार्वजनिक रूप से डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराएँ, हालांकि यह नैतिकता कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

    संभावित नुकसान और आर्थिक जोखिम

  • छँटनी और नौकरी कटौती: शटडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है। यह ट्रम्प की उस नीति का भी हिस्सा है जिसके तहत 2025 में पहले ही संघीय नौकरियों में 3 लाख की कटौती की जा चुकी है।
  • छवि और आर्थिक नुकसान: यदि शटडाउन लम्बा खिंचता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। इस स्थिति में, उनकी छवि खराब हो सकती है, और जनता का गुस्सा डेमोक्रेट्स के बजाय उनके खिलाफ भी जा सकता है।

    संक्षेप में, छोटे शटडाउन से ट्रम्प को राजनीतिक और नीतिगत फायदा हो सकता है, लेकिन लंबे शटडाउन से होने वाला बड़ा आर्थिक नुकसान उनके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

    अमेरिका में सरकार का फिस्कल ईयर (वित्तीय वर्ष) या खर्च का साल 1 अक्टूबर से शुरू होता है। यह तारीख सरकार के लिए एक आर्थिक साल की शुरुआत होती है, जिसमें वह अपने खर्च और बजट की योजना बनाती है।

  • उद्देश्य: इस अवधि में, सरकार यह तय करती है कि उसे अपना पैसा कहाँ खर्च करना है, जैसे सेना, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों में कितना आवंटन करना है।
  • शटडाउन की स्थिति: यदि 1 अक्टूबर की इस महत्वपूर्ण समय सीमा तक नया बजट पास नहीं होता है, तो सरकार को मिलने वाला पैसा रुक जाता है और सरकारी कामकाज बंद हो जाता है। इसी स्थिति को शटडाउन कहा जाता है।

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    अमेरिका में सरकारी शटडाउन लगने से सरकार के पास खर्च के लिए पैसा नहीं रहता, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, सरकारी सेवाओं और कर्मचारियों पर पड़ता है।

    सरकारी सेवाओं और कर्मचारियों पर प्रभाव

  • खर्चों में कटौती: सरकार को अपने खर्चों में भारी कटौती करनी पड़ती है, क्योंकि उसके पास खर्च के लिए धन (फंडिंग) नहीं होता।
  • सैलरी रुकना: सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी (वेतन) रुक जाती है, साथ ही अन्य कई सरकारी खर्चे भी थम जाते हैं।
  • गैर-जरूरी सेवाओं का बंद होना: शटडाउन के दौरान गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं को बंद कर दिया जाता है।
  • जारी रहने वाली सेवाएँ: हालाँकि, आपातकालीन सेवाएँ (Emergency Services), जैसे मेडिकल सर्विस, सीमा सुरक्षा (Border Security), और हवाई सेवाएँ (Air Services) जैसी आवश्यक सेवाएँ जारी रहती हैं।

    शटडाउन का इतिहास और आर्थिक नुकसान

  • शटडाउन की आवृत्ति: पिछले 50 सालों में, फंडिंग बिल अटकने के कारण अमेरिका में 20 बार सरकारी शटडाउन हुआ है।
  • ट्रम्प के कार्यकाल में: अकेले राष्ट्रपति ट्रम्प के पिछले कार्यकाल में ही सरकार को 3 बार शटडाउन का सामना करना पड़ा था।

    सबसे लंबा शटडाउन:2019 का शटडाउन सबसे लंबा था, जो 35 दिन तक चला था।इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अनुमानित रूप से ₹25 हजार करोड़ का घाटा हुआ था, जिससे पता चलता है कि लंबे शटडाउन से देश की इकोनॉमी को गंभीर नुकसान होता है।

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    सरकारी शटडाउन के दौरान अमेरिका में कई महत्वपूर्ण और अजीबोगरीब घटनाएँ सामने आई हैं, जो बताती हैं कि देश के कामकाज पर इसका कितना गहरा असर होता है।

    कर्मचारियों की कमी और सेवाओं पर असर

  • कनाडा सीमा की देखभाल (2013): 2013 के शटडाउन के दौरान, अमेरिका की 8,891 किलोमीटर लंबी कनाडा सीमा की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ एक ही शख्स को सौंप दी गई थी। बाकी सभी कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया था, जिससे सुरक्षा और साफ-सफाई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ।
  • उड़ानों का रद्द होना (2018): 2018 के शटडाउन में, वेतन नहीं मिलने की वजह से कई एयरपोर्ट कर्मचारी काम पर नहीं आए, जिसके परिणामस्वरूप कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • FBI का वित्तीय संकट (2018): 2018 के शटडाउन में FBI डायरेक्टर को चेतावनी देनी पड़ी थी कि उनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं, जिससे जाँच और अन्य जरूरी कामों में दिक्कतें आ रही थीं।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

    सैनिकों के कब्रिस्तान बंद (2013): दुनिया भर के 24 कब्रिस्तानों में (जिनमें से 20 यूरोप में हैं) अमेरिका के प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए लगभग सवा लाख सैनिक दफन हैं। अमेरिकी सरकार इनकी देखभाल का खर्च उठाती है। 2013 में शटडाउन के कारण ये सभी कब्रिस्तान बंद कर दिए गए थे, जिससे शहीदों को श्रद्धांजलि देने का काम भी रुक गया था।

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