
दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेनों की तीन-स्तरीय निगरानी
रेलवे इस वर्ष दिवाली और छठ पर्व के लिए चलाई जा रही 12,000 से अधिक स्पेशल ट्रेनों की मंडल, ज़ोन और रेलवे बोर्ड के स्तर पर गहन निगरानी कर रहा है। इस सख्त मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप, इन विशेष ट्रेनों की औसत देरी तीन घंटे से कम हो गई है। समय पर संचालन के चलते, पिछले साल की तुलना में इन ट्रेनों से 50 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है।
उच्च-स्तरीय निगरानी व्यवस्था
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव नियमित रूप से रेलवे बोर्ड में निगरानी कर रहे हैं, और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार भी लगातार नज़र बनाए हुए हैं। रेल मंत्री ने जानकारी दी कि विशेष ट्रेन के रवाना होने के बाद, उसकी लाइव लोकेशन मॉनिटर पर दिखती रहती है कि वह किस डिवीजन (मंडल) में कहाँ पहुँची है। यदि ट्रेन बिना निर्धारित ठहराव के कहीं रुकती है, तो तुरंत मंडल स्तर पर पूछताछ करके उसे आगे बढ़ाया जाता है।
अब तक, 10,700 से अधिक विशेष ट्रेनों के फेरे हो चुके हैं, जिनमें से केवल एक ट्रेन अपने गंतव्य पर छह घंटे की देरी से पहुँची है।
वैज्ञानिक भीड़ प्रबंधन
रेल मंत्री ने बताया कि इस बार भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। प्रत्येक स्टेशन के होल्डिंग एरिया में प्रति घंटे के हिसाब से यात्रियों की संख्या का आकलन किया जा रहा है। किस टाइम ज़ोन में किस स्टेशन पर कितने संभावित यात्री हो सकते हैं, इसका आकलन करके, यात्रियों की संख्या के अनुसार आस-पास के स्टेशनों से विशेष ट्रेनों को रवाना किया जा रहा है।पिछले वर्ष स्पेशल ट्रेनों से 50 लाख यात्रियों ने यात्रा की थी, जबकि इस वर्ष अब तक यह संख्या 1 करोड़ से अधिक हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि 76 स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया (प्रतीक्षा क्षेत्र) बनाए जाने से प्लेटफॉर्म पर होने वाली अनावश्यक भीड़भाड़ लगभग समाप्त हो गई है।