बीजेपी में ‘एक परिवार-एक पद’ नियम लागू
पार्टी ने तय कर लिया है कि जिन नेताओं के परिवारजन पहले से एक्टिव राजनीति में पद पर हैं, उनके बेटे-बेटियों या अन्य रिश्तेदारों को संगठन की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इस फैसले पर अमल भी शुरू हो गया है।
मऊगंज में घोषित जिला कार्यकारिणी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और मौजूदा विधायक गिरीश गौतम के बेटे को पद दिए जाने पर आपत्ति आई। इसके बाद पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी से हटाने का निर्णय लिया।

मऊगंज प्रकरण के बाद सतर्क हुई बीजेपी
मऊगंज में विधायक के बेटे को संगठनात्मक जिम्मेदारी देने और फिर उसे वापस लेने के मामले से सबक लेते हुए पार्टी ने बाकी जिलों के नेताओं को सख्त निर्देश भेजे हैं।
अब जिला अध्यक्षों, प्रभारियों और संभाग स्तर के जिम्मेदारों से कहा गया है कि नए पदाधिकारियों की सूची जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि किसी विधायक, सांसद या सक्रिय नेता के बेटे-बेटी या करीबी रिश्तेदार कार्यकारिणी में शामिल न हों।
कुछ नेताओं के परिवारजन को मिल सकती है जगह
बीजेपी में ‘एक परिवार-एक पद’ के नियम के तहत सक्रिय नेताओं के परिजन को जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। लेकिन वे वरिष्ठ नेता जो राजनीति से अलग हो चुके हैं या अब सक्रिय नहीं हैं, उनके घर के लोगों को संगठन में शामिल किए जाने पर विचार हो सकता है।
इसी आधार पर पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार, दिवंगत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा के बेटे तुष्मुल, पूर्व मंत्री माया सिंह के पुत्र पीतांबर प्रताप सिंह और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के बेटे मंदार महाजन जैसे नाम कार्यकारिणी में आ सकते हैं।
कुछ नेताओं के बेटों को संगठन में मौका मुश्किल
बीजेपी के ‘एक परिवार-एक पद’ नियम की वजह से कुछ सक्रिय नेताओं के बेटे संगठन में जिम्मेदारी नहीं पा सकेंगे।
सिद्धार्थ मलैया: पूर्व वित्त मंत्री और दमोह विधायक जयंत मलैया के बेटे दमोह में सक्रिय हैं, लेकिन पिता के सक्रिय राजनीति में रहते हुए उन्हें पद मिलने की संभावना कम है।
अभिषेक भार्गव: रहली से आठवीं बार विधायक बने पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे इलाके में सक्रिय दिखते हैं, मगर पिता की सक्रिय भूमिका के कारण संगठन में जगह मिलना कठिन माना जा रहा है।

कार्तिकेय चौहान की सक्रियता और सीमाएं
केंद्रीय कृषि मंत्री व विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय पिछले कुछ समय से बुधनी क्षेत्र में सक्रिय हैं। शिवराज के संसद जाने के बाद बुधनी उपचुनाव में उनका नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में था, लेकिन टिकट रमाकांत भार्गव को दिया गया।सुकर्ण मिश्रा को मिल सकती है निराशा
पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा दतिया में लगातार सक्रिय दिखाई देते हैं। वे क्षेत्र की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन पिता की वर्तमान सक्रियता के कारण इस समय संगठन में उन्हें कोई जिम्मेदारी मिलने की संभावना कम मानी जा रही है।
आकाश राजपूत की सक्रियता, लेकिन पद से दूर
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बेटे आकाश राजपूत सुरखी विधानसभा और सागर जिले की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से वे जनता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव बना रहे हैं। हालांकि पिता के मंत्री पद पर बने रहने के चलते उन्हें फिलहाल संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं मिलने की संभावना है।