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तमिलनाडु में दवा जांच में लापरवाही, 2024 में सिर्फ 66 हज़ार सैंपल टेस्ट; SC ने CBI जांच की मांग ठुकराई

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तमिलनाडु में निर्मित जहरीले कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' के सेवन से मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा, बैतूल, पांढुर्णा) और राजस्थान में 25 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद राज्य की दवा नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।इस दुखद घटनाक्रम के बीच, भारत के महालेखा परीक्षक (CAG) की तमिलनाडु के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर आई एक परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट (10 दिसंबर 2024) में राज्य में ड्रग टेस्टिंग और सैंपल कलेक्शन में कमी होने की बात सामने आई है। यह रिपोर्ट दवा की गुणवत्ता की निगरानी में हुई लापरवाही की ओर इशारा करती है।शुक्रवार को, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की CBI या न्यायिक जांच कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

  • यह जहरीला सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल के मालिक रंगनाथन को 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया है।
  • मामले की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है।

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CAG रिपोर्ट: तमिलनाडु में दवा परीक्षण और निरीक्षण में लगातार कमी

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट 2024 में तमिलनाडु में दवा परीक्षण (ड्रग टेस्टिंग) और निरीक्षण (ड्रग इंस्पेक्शन) को लेकर गंभीर कमियाँ उजागर हुईं:

  • लक्ष्य से कम परीक्षण: वित्तीय वर्ष 2016-17 में, 1,00,800 परीक्षण के लक्ष्य के मुकाबले केवल 66,331 नमूने ही जाँचे गए, जो कि लक्ष्य से 34% कम था।
  • निरीक्षण में कमी में वृद्धि: 2020-21 तक ड्रग्स इंस्पेक्शन में कमी बढ़कर 38% हो गई। इस वर्ष 1,00,800 परीक्षणों के लक्ष्य के सामने मात्र 62,358 परीक्षण किए गए।
  • सबसे बड़ी कमी: 2016 से 2021 की अवधि में, सबसे अधिक 40% परीक्षण की कमी 2019-20 में दर्ज की गई थी।
  • सैंपल कलेक्शन में लापरवाही: ड्रग्स इंस्पेक्टरों ने सैंपल जमा करने में भी बड़ी लापरवाही दिखाई। 2018-19 और 2020-21 के दौरान दवा के नमूने एकत्रित करने में 54% की भारी कमी दर्ज की गई।

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जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप मामला: सुप्रीम कोर्ट में दलीलें और CBI जांच की मांग खारिज

तमिलनाडु में बने कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता एडवोकेट विशाल तिवारी ने केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

कोल्ड्रिफ सिरप में मिला 48% से अधिक जहर

तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले की श्रीसन फार्मास्युटिकल की यूनिट से जब्त किए गए कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) की जाँच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

  • जहरीला रसायन: चेन्नई की सरकारी ड्रग्स टेस्टिंग लैब की 24 घंटे में आई रिपोर्ट के अनुसार, इस बैच में 48.6% w/v डाइथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिला, जो एक अत्यधिक जहरीला केमिकल है।
  • गुणवत्ता का उल्लंघन: सिरप को 'नॉन-स्टैंडर्ड क्वालिटी' का पाया गया।
  • दूषित घटक: आशंका है कि नॉन-फार्माकोपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल किया गया था, जो डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले तत्वों से दूषित हो गया। ये दोनों ही रसायन किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं।
  • अन्य चार दवाएँ (रेस्पोलाइट D, GL, ST और हेप्सैंडिन सिरप) गुणवत्ता मानक के अनुरूप पाई गईं।
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जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत की घटना के बाद, केंद्र सरकार ने देश भर में सिरप बनाने वाली फार्मा कंपनियों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • देशव्यापी जाँच: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) अब पूरे देश में सिरप बनाने वाली फार्मा कंपनियों की जाँच करेगा और सैंपल की टेस्टिंग करवाएगा।
  • राज्य सरकारों से मांगी लिस्ट: सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सिरप बनाने वाली कंपनियों की पूरी सूची मांगी है।
  • तीन सिरप पर रोक: CDSCO ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचित किया है कि तीन कफ सिरप—कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश-टीआर, और रिलाइफ—की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगा दी गई है।

कोल्ड्रिफ' (ColdRif) कफ सिरप से जुड़ा मामला एक गंभीर जनस्वास्थ्य त्रासदी है, जिसमें मध्य प्रदेश (MP) और राजस्थान में बच्चों की मौत हुई है।

  • निर्माता: इस जहरीले कफ सिरप का निर्माण तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी ने किया था।
  • मौतें और शिकार: इस सिरप के सेवन से मध्य प्रदेश और राजस्थान में अब तक कम से कम 25 बच्चों की मौत हो चुकी है।
  • जहर का खुलासा: जाँच में पाया गया कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल नामक अत्यंत जहरीला रसायन मिला हुआ था।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: DEG एक विषैला पदार्थ है जो इंसानों में किडनी (गुर्दे), लिवर (यकृत) और इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को गंभीर और अपरिवर्तनीय क्षति पहुँचा सकता है, जिसके कारण बच्चों की मौत हुई।

यह मामला भारत के दवा नियामक प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करता है।


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