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इंटरनेट बहाल के बावजूद सामान्यता का दावा

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ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन लेह की अध्यक्ष रिगजिन वाग्मो लेचिक ने भारी मन से बताया कि लेह में हाल ही में हुई हिंसा ने पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान पहुँचाया है।लेचिक के अनुसार, लेह की घटना से पहले पहलगाम की घटना से 50% टूरिस्ट का नुकसान हुआ था, लेकिन लेह की हिंसा के कारण यह नुकसान बढ़कर 80% हो गया है। शहर के लगभग 2000 गेस्ट हाउस और होटल पूरी तरह खाली पड़े हैं।चूंकि लद्दाख की कुल जीडीपी में पर्यटन का योगदान 50% है, इसलिए यह संकट गहरा है। आमतौर पर, अक्टूबर में अगले साल (मार्च-अप्रैल) के लिए प्री-बुकिंग शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार एक भी बुकिंग नहीं हुई है। लेचिक ने चिंता जताई कि बर्फबारी शुरू होने और सब कुछ बंद होने से पहले अगर वे नहीं कमा पाते हैं, तो अगले छह महीने तक गुज़ारा करना मुश्किल होगा।इस बीच, लद्दाख की राजधानी लेह में गुरुवार रात को इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई, हालांकि इसका कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद इंटरनेट बंद कर दिया गया था। प्रशासन अब भी सतर्क है, और कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर 'फर्जी खबरें' (फेक न्यूज़) फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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लेह में 16 दिन बाद इंटरनेट बहाल: शांति और आजीविका संकट

लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद 16 दिनों तक इंटरनेट सेवाएँ पूरी तरह बंद रहीं—इसमें 2G से लेकर 5G और सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क तक शामिल थे। इस हिंसा ने लेह की शांति भंग कर दी थी, जो कि सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनशन के बीच हुई थी।

शांति नहीं, धारा 163 लागू

लेह अपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे ने प्रशासन के 'सब कुछ सामान्य' होने के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि शहर में अभी भी धारा 163 लागू है, जिसके कारण पाँच से अधिक लोग एक साथ खड़े नहीं हो सकते हैं। हिंसा के आरोप में 39 लोग अभी भी पुलिस हिरासत में हैं।हालांकि स्कूल खुल गए हैं, लेकिन बच्चे कक्षाओं में नहीं पहुँच रहे हैं। पूरे लेह के लोग वांगचुक के समर्थन में हैं, पर कमाई की मजबूरी और बर्फीली ठंड की शुरुआत के कारण लोगों को अपने बाज़ार खोलने पड़ रहे हैं।

टैक्सी ऑपरेटर्स का गहरा संकट

लेह की आजीविका पर सबसे बड़ी मार पर्यटन से जुड़े लोगों पर पड़ी है। लेह टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष थिंलेस नामग्याल ने बताया कि 24 सितंबर से अब तक उन्हें एक भी बुकिंग नहीं मिली है। यूनियन के लगभग 6 हज़ार टैक्सी ऑपरेटर खाली बैठे हैं और उनके परिवार मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

फायरिंग के आदेश पर बड़ा सवाल

शेरिंग दोरजे ने फायरिंग के आदेश को लेकर गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को भीड़ की पत्थरबाजी के जवाब में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें 4 नौजवान मारे गए।दोरजे का कहना है कि वे 16 दिनों से पूछ रहे हैं कि फायरिंग का आदेश किसने दिया था, लेकिन उप राज्यपाल (LG) प्रशासन इस पर चुप है। अपेक्स बॉडी मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रही है ताकि मृतकों के परिजनों को न्याय मिल सके।लेह के डिप्टी कमिश्नर ने हिंसा की जांच का जिम्मा एसडीएम नुब्रा मुकुल बेनीवाल को सौंपा है, लेकिन लेह अपेक्स बॉडी ने इसे खारिज कर दिया है। अपेक्स बॉडी के कुछ सदस्यों ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि उनकी अपनी पड़ताल से पता चला है कि फायरिंग का आदेश स्थानीय प्रशासन ने नहीं दिया था। इसलिए, वे जानना चाहते हैं कि इसके पीछे कौन है और किसकी साज़िश है, और वे एक ईमानदार जांच चाहते हैं।

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सोनम वांगचुक: जोधपुर जेल में, सुप्रीम कोर्ट में 14 अक्टूबर को सुनवाई

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने जोधपुर सेंट्रल जेल में उनसे मुलाकात की है और बताया कि उनका हौसला और संकल्प अडिग है।वांगचुक को 24 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उनकी कानूनी टीम को निरोध (detention) आदेश की प्रति मिल गई है, जिसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे 4 लोगों की मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग पर कायम हैं और जब तक जांच नहीं होती, वे जेल में ही रहेंगे।इस बीच, गीतांजलि ने वांगचुक की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका पर 14 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है।

 


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