ट्रैफिक पुलिस, EMI रिकवरी और सोशल मीडिया: जानिए नागरिक के अधिकार
नई दिल्ली: 10 दिसंबर, International Human Rights Day पर आम नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन में छुपे मानवाधिकारों की अहमियत पर चर्चा जरूरी हो जाती है। सड़क पर ट्रैफिक चेक, लोन के पैसे न चुका पाने पर धमकियां, या सोशल मीडिया पर प्राइवेसी का उल्लंघन—ये सभी हमारी मानवाधिकार की पहली परत से जुड़ी घटनाएं हैं।
हमने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने एडवोकेट संदीप मिश्रा से विस्तारपूर्वक बातचीत की।
ट्रैफिक पुलिस का मनमाना व्यवहार: क्या करें?
सवाल: अगर कोई ट्रैफिक पुलिस बिना कारण गाड़ी की चाभी निकाल ले और कहे कि पेपर लेकर आओ, तो क्या ऐसा करना सही है?
संदीप मिश्रा का जवाब:
यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। पुलिस केवल उचित प्रक्रिया के तहत चेकिंग कर सकती है। गाड़ी की जबरन चाबी निकालना और मनमानी करना आर्टिकल 14 और संविधान के अधिकारों का हनन है।
क्या करना चाहिए:
घटना की फोटो/वीडियो लें।
सोशल मीडिया (खास तौर पर एक्स) पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को टैग करें।
112 हेल्पलाइन पर कॉल करें और घटना की रिपोर्ट करें।
अगर पुलिस मनमाने तरीके से थाने में बैठाती है, तो लिखित शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक, ACP, DCP या थाना प्रमुख को भेजें।
सोशल मीडिया: नागरिकों का सबसे बड़ा हथियार
सोशल मीडिया के जरिए आप घटना को सार्वजनिक करके त्वरित कार्रवाई करवा सकते हैं। अधिकारियों को टैग करना सुनिश्चित करें। इसके बाद उनका जवाब देना कानूनन जरूरी होता है।
कौन-कौन से अधिकारी को टैग करें:
गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन: मुख्यमंत्री कार्यालय, DGP, जिला पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी
मामूली मामले (जैसे ट्रैफिक): ACP, DCP, पुलिस अधीक्षक
EMI और बैंक रिकवरी एजेंट: क्या है हक
कोई भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन अवैध तरीके से EMI रिकवरी नहीं कर सकता। धमकाना, मानसिक प्रताड़ना देना पूरी तरह असंवैधानिक है।
क्या करें:
सीधे बैंक या अधिकृत अधिकारी से संपर्क करें।
RBI के Ombudsman पोर्टल पर शिकायत करें।
पुलिस में कम्प्लेन करें यदि धमकाया गया हो।
प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा
निजी जानकारी, बैंक डिटेल, आधार नंबर, और फोटो साझा करते समय सतर्क रहें।
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए डेटा को सुरक्षित रखें।
अगर प्राइवेसी का उल्लंघन हो, तुरंत साइबर क्राइम सेल या IT विभाग को सूचित करें। हेल्पलाइन नंबर: 1930
वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकार
SC/ST कानून, महिला आयोग, बाल आयोग और राज्य स्तरीय आयोग विभिन्न वर्गों के हक़ की रक्षा करते हैं।
शिकायत करने के लिए पोस्ट, CGRS/IGRS या CPGRAMS पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
RTI के जरिए कार्रवाई की जानकारी ली जा सकती है।
आम नागरिक कितने जागरूक हैं?
संदीप मिश्रा का कहना है कि भारत में आम नागरिक अपने मानवाधिकारों के प्रति काफी जागरूक हैं। कभी-कभी कम पढ़े-लिखे लोग अधिक सतर्क रहते हैं, जबकि अमीर लोग इन मामलों में पीछे रहते हैं।
मानवाधिकार केवल किताबी बात नहीं हैं। यह हर नागरिक की गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षा की पहली ढाल है। ट्रैफिक चेक, EMI, सोशल मीडिया, बैंकिंग या थाने में बैठाने जैसी रोजमर्रा की घटनाओं में भी नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं—अगर वे जानकार और सतर्क रहें।