
गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट में हॉट एयर बैलून में तकनीकी दिक्कत
मंदसौर के गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट में शनिवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हॉट एयर बैलून की सवारी के लिए पहुँचे। आयोजन कंपनी की ओर से पर्याप्त जांच के बिना ही बैलून में मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों को बैठा दिया गया। तेज हवा और तकनीकी खामी के कारण बैलून उड़ान नहीं भर सका और झुकने से निचला हिस्सा आग की चपेट में आ गया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने आग बुझाई और सुरक्षा टीम ने तुरंत सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
गांधीसागर महोत्सव में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
गांधीसागर महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा को लेकर लापरवाही की चर्चा सामने आई है। पर्यटन विकास निगम ने पांच वर्ष के लिए आयोजन का ठेका गुजरात की लल्लूजी एंड संस कंपनी को दिया है, लेकिन कंपनी पर बार-बार लापरवाही बरतने के आरोप लगते रहे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने महोत्सव का शुभारंभ किया और रात्रि विश्राम भी गांधीसागर में किया था।
गांधीसागर में हॉट एयर बैलून कार्यक्रम में गड़बड़ी
शनिवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पीड बोट और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया। इसके बाद वे हॉट एयर बैलून की सवारी के लिए पहुँचे। उनके साथ सांसद सुधीर गुप्ता और गरोठ विधायक चंदरसिंह सिसौदिया भी मौजूद थे। गर्म हवा भरने के बावजूद तेज हवा के कारण बैलून उड़ नहीं सका और झुकने से निचले हिस्से में आग लग गई। कर्मचारियों ने तुरंत आग बुझाई और सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमंत्री सहित सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हॉट एयर बैलून कैसे उड़ता है – प्रबंधन की सफाई
गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के मैनेजर सौरभ गुप्ता ने बताया कि हॉट एयर बैलून को उड़ाने के लिए गर्म हवा की आवश्यकता होती है। हवा को गर्म करने की प्रक्रिया से ही गुब्बारा ऊपर उठ पाता है और तैरता रहता है। इसी कारण इसमें आग का इस्तेमाल किया जाता है।
कलेक्टर का बयान – सुरक्षा मानकों का पूरा पालन
कलेक्टर अदिति गर्ग ने कहा कि हॉट एयर बैलून को लेकर सुरक्षा के सभी नियमों का पालन किया गया है और किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केवल बैलून को देखने पहुँचे थे। हॉट एयर बैलून की उड़ान प्रक्रिया में गर्म हवा की आवश्यकता होती है, जिससे गुब्बारा ऊपर उठ सके और संतुलन बनाए रखे।
बैलून घटना पर जवाबदेही को लेकर उठे सवाल
हॉट एयर बैलून की घटना पर कलेक्टर और आयोजन कंपनी प्रबंधन के स्पष्टीकरण के बावजूद सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि उड़ान की प्रक्रिया सभी को पता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मुख्यमंत्री और अन्य लोग बैलून में बैठने के बाद भी उड़ान क्यों नहीं भर पाए। घटना के समय की परिस्थितियों पर कंपनी को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।