दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। यह हलफनामा, जो 177 पन्नों का है, उन आरोपियों की जमानत याचिकाओं के संदर्भ में पेश किया गया है जिन पर दंगे की साजिश में शामिल होने का आरोप है।पुलिस ने अदालत को बताया है कि जांच में गवाहों के बयान, दस्तावेज़ और तकनीकी साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि इन दंगों को एक योजनाबद्ध साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। पुलिस का दावा है कि इस साजिश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध को एक औज़ार (हथियार) के रूप में इस्तेमाल किया गया था।पुलिस के अनुसार, साजिश का मकसद सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य देशभर में हिंसा फैलाना था, जिसमें उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक जैसे राज्य भी निशाने पर थे। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ आरोपी, जिनमें उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोग शामिल हैं, इस पूरी साजिश के सूत्रधार थे और उन्होंने लोगों को उकसाया।फरवरी 2020 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी।इस हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी और कई लोग घायल हुए थे।

पुलिस का आरोप: झूठी याचिकाओं से केस में देरी
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मामले के आरोपी बार-बार निराधार (झूठी) याचिकाएं दायर कर रहे हैं।पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील राजत नायर व ध्रुव पांडे ने अदालत को जानकारी दी कि इन याचिकाओं का मुख्य उद्देश्य केस की सुनवाई में जानबूझकर देरी करना है।पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने (रुकावट डालने) के समान है।

अगला कदम: सुप्रीम कोर्ट अब पुलिस द्वारा दाखिल किए गए इस हलफनामे पर विचार करेगा और आगे सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान स्थिति
- सुनवाई की तारीख: सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को करेगा।
- समय देने से इनकार: 29 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए दिल्ली पुलिस को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय देने से मना कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी: जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की अतिरिक्त समय की मांग को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस को पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है।
2020 दिल्ली दंगा केस: मुख्य घटनाक्रम
समय-सीमा घटना फरवरी 2020 दंगे भड़के: CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा। लगभग 54 लोगों की मौत और 700 से अधिक घायल हुए।
मामला दर्ज: उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य को कथित मास्टरमाइंड बताते हुए UAPA और IPC के तहत केस दर्ज किया गया।
अगस्त 2020 शरजील इमाम को गिरफ्तार किया गया। सितंबर 2020 उमर खालिद समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 2022 निचली अदालतों द्वारा जमानत याचिका खारिज। 2022-24 निचली अदालतों के आदेशों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में कई जमानत याचिकाएं दायर की गईं। 9 जुलाई 2025 दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा। 2 सितंबर 2025 दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम सहित 9 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। 13 अक्टूबर 2025 शरजील इमाम ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी दी।