उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुम्भ की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच रही हैं। करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन ने काम करने का तरीका बदल दिया है। इसी कड़ी में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कार्यालयी बैठकों की बजाय मौके पर जाकर स्टैंडअप मीटिंग लेने की पहल शुरू की है।

पुल निर्माण स्थलों का निरीक्षण, वहीं ली बैठक
शुक्रवार को कलेक्टर रौशन सिंह ने लोक निर्माण विभाग (सेतु) द्वारा किए जा रहे पुल निर्माण कार्यों का सीधे स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने कर्कराज पार्किंग से भूखी माता मंदिर तक बनने वाले पुल और क्षिप्रा नदी पर प्रस्तावित छोटे पुल के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कर्कराज पार्किंग से भूखी माता लाल पुल मार्ग पर क्षिप्रा नदी पर बन रहा नया 4-लेन पुल तेज़ी से निर्माणाधीन है और कार्य तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा।
गुणवत्ता से समझौता नहीं, समय पर हो काम
कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों को गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने और सभी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर ही टेस्टिंग लैब स्थापित करने के निर्देश भी दिए, ताकि निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की नियमित जांच की जा सके।
अधिकारियों को कार्यालय बुलाने की बजाय मैदान में बैठक
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बार-बार अधिकारियों को कार्यालय बुलाने में समय की बर्बादी हो रही थी। इसी कारण कलेक्टर ने यह रणनीति अपनाई है कि जहां काम चल रहा है, वहीं अधिकारी बुलाकर निर्णय लिए जाएं, ताकि फाइलों और बैठकों में समय न गंवाकर सीधे काम में तेजी लाई जा सके।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस दौरान आयोजित स्टैंडअप मीटिंग में मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी गोपाल डाड, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, सेतु विभाग के कार्यपालन यंत्री पी.एस. पंथ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन सख्त
प्रशासन का साफ संदेश है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और धरातल पर दिखाई देने वाले कामों के जरिए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।