सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों को जेल में रखना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।यह आदेश नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव (पहलवान) की रिहाई के संदर्भ में आया है। सुखदेव ने इस मामले में 20 साल की सजा पूरी कर ली थी, लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया गया था। कोर्ट ने उनकी रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि सजा पूरी होने के बाद किसी को भी जेल में बंद रखना गलत है।सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जिन कैदियों ने अपनी सजा की अवधि पूरी कर ली है और किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, उन्हें तत्काल जेल से रिहा किया जाए।
सजा पूरी करने के बाद भी कैदी को जेल में रखना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को सुखदेव पहलवान की रिहाई का आदेश दिया था, जो नीतीश कटारा हत्याकांड का दोषी था। हालांकि, सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने उसके आचरण का हवाला देते हुए उसकी रिहाई पर रोक लगा दी थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि किसी भी अदालत के आदेश को एसआरबी कैसे नज़रअंदाज़ कर सकता है? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुखदेव को अपनी 20 साल की सज़ा पूरी होने के बाद रिहा किया जाना चाहिए था।
इस मामले में, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने दलील दी थी कि आजीवन कारावास का मतलब है, दोषी का शेष जीवन जेल में बिताना, और 20 साल की सज़ा के बाद स्वतः रिहाई नहीं हो सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि अगर किसी कैदी ने अपनी सज़ा पूरी कर ली है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।